वैट (VAT) क्या है । वेट का फुल फॉर्म क्या है? । मूल्य संवर्धित कर-प्रणाली क्या है?

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Vat Kya Hai?

VAT Kya Hai In Hindi

वैट (Value Added Tax) जो कि भारत के लिए एक नई कर-प्रणाली है, लेकिन यहां प्रणाली भारत से पहले विश्व के लगभग 140 देशों में यहां सफलतापूर्वक पहले से ही लागू है। इस प्रणाली को सबसे पहले 1954 में फ्रांस में लागू किया गया था, भारत में राजा जे. चल्लेया कमेटी की सिफारिशों के पश्चात केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise duty) एवं केंद्रीय बिक्री कर (Central sales tax) के स्थान पर मूल्य वैट (VAT) प्रणाली को अपनाने के प्रयास काफी लंबे समय से चले आ रहे थे। वर्तमान केंद्रीय सरकार ने इसे अप्रैल 2005 में लागू किया था।

Vat Kya Hai

भारत में जुलाई सन् 1991 से आर्थिक सुधार कार्यक्रम प्रारंभ किए गए थे तथा इनका क्रियान्वयन भी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में विश्व स्तरीय प्रतियोगिता विकसित करने और इसे परिवर्तित अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से किया गया था ताकि विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ भारत को विदेशी निवेश के लिए एक आदर्श क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सके। जबकि तब विश्व के 140 देश में वैट प्रणाली को अपनाया जा चुका था, फिर भी भारत जैसी उद्दीप्त होती हुई अर्थव्यवस्था में इसे लागू करने के पीछे अपेक्षित कई कारण थे?

वैट का इतिहास बताता है कि जिन भी देशों ने इसको लागू किया उन देशों में न केवल राजस्व संग्रहण में वृद्धि हुई बल्कि वस्तुओं की लागत में कमी के कारण उपभोक्ताओं को भी राहत मिली। हमारे पड़ोसी देश चीन को भी कभी बंद अर्थव्यवस्था का प्रतीक माना जाता था, परंतु 3 जनवरी 1994 को चीन की सरकार ने वेट लागू कर दिया था उसके पश्चात चीन की अर्थव्यवस्था ने तेजी के साथ प्रगति की है। भारत प्रगति कि वह रफ्तार नहीं पकड़ पाया जो कि चीनी अर्थव्यवस्था ने हासिल की है।

वैट का अर्थ – VAT Ka Matlab Kya Hai-

Vat Fullform In Hindi

वैट का हिंदी अर्थ है मूल्यवर्धित कर। यहां बिक्री कर व सरचार्ज आदि के स्थान पर लागू होने वाला कर है, जिसे किसी भी वस्तु के मूल्यवर्धन पर लगाया जाता है। जब भी कोई वस्तु बिक्री प्रणाली व उत्पादन प्रणाली के कई हाथों से निकलती है तो हर मुकाम पर उस वस्तु के बिक्री मूल्य पर यह कर लगाया जाता है। यदि किसी वस्तु के मूल्य में या किसी को पद्धति द्वारा या मुकाम पर उस वस्तु के गुणों में वृद्धि होती है तो प्रत्येक ऐसे अवसर पर कर लगता है। लेकिन जब इसकी अंतिम बिक्री होती है उस दशा में ही कर पूर्ण रूप से लगता है।

इस प्रकार इस कर प्रणाली में उत्पाद में पिछले मूल्यवर्धन के अवसर या मुकाम पर या बिक्री के अवसर पर दिया गया वैट बाद की बिक्री अवसर पर घटा दिया जाता है ताकि केवल मूल्यवर्धन पर ही कर लगे। इस प्रकार यहां अलग-अलग अवसर पर अलग-अलग मुकाम पर किस्तों में वसूल किया जाता है।

वैट के जिन प्रतिकूल प्रभाव की चर्चा जोर-शोर से रही है, उनमें निम्नलिखित प्रमुख है-

• वस्तुओं की कीमत बढ़ने की संभावना।
• वेट भी लग रहा है वह दूसरे कर भी लगेंगे।
• बिना कंप्यूटर के इस प्रणाली के तहत कार्य करना असंभव है।
• कानूनी रूप से अत्यंत जटिल है।
• शर्त के अनुसार कोई भी केंद्रीय कर नहीं हटाया गया है।
• भारत का वैट विदेशों में प्रचलित वैट से भिन्न है।
• गोदामों व वेयरहाउस को सील भी किया जा सकता है।

सैद्धांतिक तौर पर जिस वस्तु पर वैट लगाया जाएगा उसकी कीमत वर्तमान कीमत से कम होनी चाहिए क्योंकि हर मुकाम पर या पड़ाव पर पूरे वैट की दर से कर नहीं लगेगा बल्कि उस वस्तु पर जितना वैट पहले लग चुका है वह घटाया जाएगा। लेकिन यदि किसी वस्तु पर वैट नहीं लगता है और वह वैट के अन्तर्गत आती है तो वह अवश्य महंगी होगी। लेकिन ऐसा तभी होगा जब वह काले बाजार में बिना बिल के बिकती हो।

वैट लागू होने के बाद आदर्श स्थिति में ग्राहक को लाभ ही लाभ होगा और उस पर कर का बोझ कम होगा, लेकिन व्यापारियों की जो मुख्य आपत्तियां हैं, उसके बारे में केन्द्र सरकार को विचार कर पहल करनी चाहिए। केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह वैट का आकलन करने के लिए कम्प्यूटर के जरिये डाटाबेस बनाए जैसा कि ‘टिन’ अर्थात ‘इनकम टैक्स इनफॉर्मेशन नेटवर्क’ के लिए किया गया।

इस कर के बारे में जगह – जगह सेमिनार व सभाओं के जरिये व्यापारियों को इस पद्धति के बारे में बताया जाए। टेलीविजन पर कार्यक्रम दिखाकर व्यापारियों का विश्वास जीता जाए और उन्हें यह समझाया जाए कि वैट से किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और सभी को लाभ होगा।

भारत के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा वेट पर प्रस्तुत श्वेत पत्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं-

• 550 मदों को वैट की परिधि मैं लाने का प्रयास किया गया है।

• 550 मदों पर समस्त राज्यों में समान कर लगाने का प्रयास किया गया है।

• अधिकांश वस्तुओं पर 12.5% की दर से वेट लगेगा।

• 270 वस्तुओ पर 4% की दर से वैट लगाया जाएगा।

• किमती धातुओं पर 1% की दर से वेट लगाया जाएगा।

• औषधियों, कृषि और औद्योगिक से जुड़ी वस्तुओं पर 4% की दर से वैट लगाया जाएगा।

• राज्यों को चाय पर 12.5% या 4% वेट चुनने की छूट प्रदान की गई है।

• वेट लागू होने के बाद कर भार में कमी की प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होगी।

• ₹5 लाख तक वार्षिक व्यापारिक टर्नओवर वाले व्यापारियों को वैट की परिधि से पूर्णता मुक्त रखा गया है।

• ऐसे व्यापारियों, जिनका व्यापारिक लेन-देन 5 लाख रूपए से 50 लाख रुपए तक वार्षिक है, उन पर 1% की दर से वैट लगेगा।

• मदों – वस्त्र, चीनी और तंबाकू जो कि अतिरिक्त उत्पाद शुल्क संरचना के अंतर्गत आती है, उनको 1 वर्ष की अवधि के लिए वेट की परिधि से मुक्त रखा गया हे।

•10 वस्तुओं पर वैट आरोपित करने पर राज्य विशेष को पूर्ण छूट प्रदान की गई है।

FAQ About VAT-

वैट से जुड़े सवाल?
VAT related questions?

प्रश्न: वैट का फुल फॉर्म क्या है?
उत्तर: वैट का फुल फॉर्म वैल्यू ऐडेड टैक्स है।

प्रश्न: What is the full form of VAT?
उत्तर: The full form of VAT is Value Added Tax.

प्रश्न: वैट किस प्रकार की प्रणाली है?
उत्तर: वैट एक कर-प्रणाली है।

प्रश्न: वैट को सर्वप्रथम कहां और कब लागू किया गया था?
उत्तर: वैट को सर्वप्रथम 1956 में फ्रांस में लागू किया गया था।

प्रश्न: वैट प्रणाली को भारत में कब लागू किया गया था?
उत्तर: वैट प्रणाली को भारत में 2005 में अपनाया गया था।

प्रश्न: वैट का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर: वैट का हिंदी अर्थ मूल्यवर्धित कर है।

प्रश्न: चीन में वैट कब लागू हुआ था?
उत्तर: चीन में वैट 3 जनवरी 1994 को लागू हुआ था।

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