उदयपुर, राजस्थान में देखने लायक सबसे अच्छी जगहें -उदयपुर में कहा कहा घूमे

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उदयपुर में कहा कहा घूमे

उदयपुर: राजस्थान का अधिकांश भाग मरुस्थल की विशेषताओं से युक्त है। इसमें मोती समान स्वच्छंद झीलों, विशाल एवं भव्य महल तथा सघन प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न उदयपुर नगरी मरुस्थल में मृगतृष्णा जैसा प्रतीत होता है।

अरावली पर्वत श्रेणियों से घिरे इस हरे-भरे शहर की सुंदरता का श्रेय महाराणा उदय सिंह जी को जाता है, महाराणा उदय सिंह जी ने सन् 1959 मैं चित्तौड़ के पतन के पश्चात उदयपुर को अपनी नई राजधानी बनाने के लिए उपयुक्त स्थान समझा। यहां सुंदर शहर ‘झीलों की नगरी’ तथा ‘पूर्व का वेनिस’ आदि नामों से भी जाना जाता है। अपने प्राकृतिक सौंदर्य एवं सम्पदा, ऐतिहासिक दुर्ग व महल तथा वीरों की शौर्य गाथाएं आज भी रोमांचित करती है।

उदयपुर में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहे!

सिटी पैलेस:-
पिछोला झील के किनारे संगमरमर और ग्रेनाइट पत्थर का बना यह भव्य महल बहुत पुराना एवं आकर्षक है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा महल माना‌ जाता है। यह अपनी उत्कृष्ट शिल्प कला के कारण विख्यात है। महल का दक्षिणी भाग को भव्य खुबसूरत होटल में परिवर्तित किया गया है।

लेक पैलेस:-
पिछोला झील के मध्य में बना यहां अति सुंदर महल आजकल आलीशान आरामदायक होटल है। सफेद पत्थर से बना यह पैलेस का निर्माण महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने 1743 में करवाया था जिसका कार्य पूरा हुआ 1746 में, महाराणा जगत सिंह ने इस पैलेस निर्माण गर्मियों के दिनों में रहने के लिए करवाया था, इसे जग निवास कहा जाता था। जिसे 19 वीं शताब्दी में इसे होटल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया, जहां ज्यादातर कपल्स घूमने के लिए आते हैं

पिछोला झील:-
यह शहर की एक महत्वपूर्ण झील है। पिछोला गांव के निकट इस झील का निर्माण 14 शताब्दी में राणा लाखा के काल में करवाया था। यह झील 696 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जिसकी गहराई करीब 8.5 मीटर है।
पिछोला झील महलों, पहाड़ियों, बागो, तथा छतरियों से घिरी हुई है। किसी झील के मध्य में 2 द्वीपों पर जगमंदिर वह जग निवास महल बने हुए हैं। यहां झील के पानी की कृतिम झील जिससे शहर में पानी सप्लाई होता है।

मेवाड़ समारोह:-
उदयपुर में बसंत ऋतु में प्रत्येक मार्च/अप्रैल माह में गणगौर का रंगीला त्यौहार मेवाड़ समारोह के रूप में मनाया जाता है।

आयड़:-
ईसा से 4000 वर्ष पूर्व के सादरी प्रागैतिहासिक काल के खण्डहर यहां पाए गए हैं। यह मेवाड़ की पुरानी राजधानी थी

हल्दीघाटी:-
यहां प्रसिद्ध रणभूमि उदयपुर शहर से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। राणा प्रताप सिंह ने यहां 1576 में मुगलों से युद्ध किया था। यहां उनका स्वामी भक्त घोड़ा चेतक, जो घायल व खून से लथपथ होते हुए भी अपने स्वामी राणा प्रताप को घायल अवस्था में यहां तक सुरक्षित लाया था, चेतक कि यहां छतरी है।

एकलिंग जी:-
मंदिर में एकलिंग जी का मंदिर है जो कि मेवाड़ के राणा के कुलदेवता है जोकि उदयपुर से 21 वर्ग किलोमीटर दूर नागद्वार सड़क पर स्थित है।

चावन्ड:-
राणा प्रताप ने अपने जीवन काल का अंतिम समय इसे छोटे से गांव में व्यतीत किया था। उनका ध्वस्त महल, चामुंडी देवी का मंदिर तथा उनकी स्मृति में बनाई गई छतरी भी दर्शनीय है।

कांकरोली:-
उदयपुर से 65 किलोमीटर दूर यहां झील के किनारे बसा हुआ है। कांकरोली में भगवान कृष्ण के मंदिर, दयाल शाह की उत्कृष्ट खुदाई, संगमरमर की सीढ़ियां, अपने सुंदर महलों एवं नौचोकिया के लिए प्रसिद्ध है।

ऋषभ देव:-
उदयपुर से 65 किलोमीटर दूर अहमदाबाद रोड पर भगवान ऋषभदेव का 15 वी शताब्दी में बना मंदिर प्रसिद्ध है जहां हिंदू एवं जैन दर्शनार्थ जाते हैं।

रणकपुर:-
जैन धर्म के इस मुख्य तीर्थ स्थल में तीन-मंजिला चौमुखा मंदिर विशेष महत्व का है, किसमें 1444 स्तंभों के आधार पर निर्मित 80 गुंबदों मैं की गई कलापूर्ण नक्काशी दर्शनीय है। मंदिर के अन्दर आदिनाथ जी की भी प्रतिमा है।

कुंभलगढ़:-
राणा कुंभा द्वारा बनवाए गए 15 वी शताब्दी में निर्मित प्रसिद्ध दुर्गा महल दर्शनीय है।

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