शिक्षक दिवस पर निबंध – Essay On Teachers Day (500 Words)

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शिक्षक दिवस पर निबंध - Essay On Teachers Day (500 Words)

शिक्षक दिवस हमारे देश में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस के अवसर पर मनाया जाता है, शिक्षक दिवस हमारे देश में ही नहीं बल्कि कई सारे देशों में मनाया जाता है जैसे अमेरिका के मई के पहले मंगलवार को ‘नेशनल टीचर्स डे’ मनाया जाता है।

शिक्षक दिवस पर निबंध 500 Words – Essay On Teachers Day (500 Words)

दुनिया भर के शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है, हमारे देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन की शिक्षा, ज्ञान-कौशल, वह शिक्षा प्रेम के कारण मनाया जाता है, इस दिन विद्यालय का कार्यभार विद्यार्थियों को सौंप दिया जाता है, और सभी विद्यार्थी अपने गुरु का सम्मान करने के लिए अच्छे अच्छे कार्यक्रम तैयार करते हैं।

शिक्षा का महत्व संपूर्ण विश्व में स्वीकार किया जाता रहा है। इस कारण हमारी भारतीय संस्कृति में भी शिक्षक (गुरु) के महत्व को सबसे बड़ा माना गया है।

शिक्षक दिवस हमारे देश में 5 सितंबर को मनाया जाता है इस दिन प्रत्येक व्यक्ति अपने गुरु का सम्मान करते है उनका आदर करते है, शिक्षक दिवस हमारे देश में ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में मनाया जाता है, जैसे हमारे यहां 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है वहीं अमेरिका में मई के महीने के पहले मंगलवार को ‘नेशनल टीचर्स डे’ मनाया जाता है, चीन में शिक्षक दिवस 1 सितंबर के दिन मनाया जाता है, ब्रुनेई में प्रतिवर्ष 23 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, वेनेजुएला में 15 जनवरी को, कोरिया में 15 मई को तथा ताइवान में 28 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

हमारे देश के महान शिक्षक डॉ राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को मद्रास के तिरुपति नामक गांव में हुआ था। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में कई परेशानियों का सामना किया था। डॉ राधाकृष्णन भाग्य से ज्यादा कर्म में विश्वास रखते थे। वे आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्यापक थे, वह दर्शनशास्त्र की शिक्षा देते थे। सन् 1952 में वे देश के पहले उपराष्ट्रपति चुने गए और 10 वर्षों तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे। और 13 मई 1962 को इन्हे देश का दूसरा राष्ट्रपति चुना गया, ये राष्ट्रपति पद पर 13 मई 1967 तक रहे।

सादगी से जीवनयापन करने वाले डॉ. राधाकृष्णन को बच्चों से बहुत स्नेह था, डॉ राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 वर्ष अध्यापक करते हुए व्यतीत किए थे, उन्हें पुस्तकों से भी अधिक लगाव था।

आपके लिए –

देश आजाद होने के बाद जब उच्च शिक्षा की नई व्यवस्था की स्थापना का सवाल आया, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद ने शिक्षा आयोग की नियुक्ति की योजना बनाई। उस दौरान शिक्षा आयोग का अध्यक्ष डॉ राधाकृष्णन को चुना गया। इस पद के लिए डॉ राधाकृष्णन से सर्वाधिक योग्य कोई नहीं था।

सन 1950 में शिक्षा आयोग की रिपोर्ट प्रकाशित हुई और आज भी भारत की शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद वही रिपोर्ट बनी हुई है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने हमेशा देश की सेवा निस्वार्थ भाव से की थी, वह एक राष्ट्रभक्त थे, और इसी तरह देश की सेवा करते हुए 16 अप्रैल 1975 को डॉ. राधाकृष्णन का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। भारत के साथ साथ पश्चिमी देशों में भी भारतीय परचम लहराने वाले डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण का नाम एक महान शिक्षक के रूप में सदैव याद रखा जाएगा। वे प्रत्येक शिक्षक व छात्र के लिए एक प्रेरणा स्तोत्र है।

तो ये था शिक्षक दिवस पर निबंध आशा करते है, यह आपको पसंद आया होगा।

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