राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान निबंध

राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका निबंध

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में उस राष्ट्र की आधी आबादी अर्थात् नारी की भूमिका की महानता को भुलाया नही सकता। आज हमारे घर और देश को नारी ही चला रहीं है। ये सब हम अच्छे से जानते है की हमारे देश में महिलाओं का अभी तक क्या योगदान रहा है।

हमारे यहाँ शास्त्रों में कहा गया है कि –
‘यत्र नार्यस्तु पूजयंते रमंते तत्र देवताः’
अर्थात् जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है।

नारी एक बच्चे को 9 महीने तक कोख में रखती है फिर उसे इस दुनिया में लाती है और जिंदगी भर उससे प्यार करती है। नारी दुनिया के सभी रिश्तो को संभालती है नारी अपने बच्चों की मां होती है, अपने भाई की बहन है, एक पति की पत्नी है, नारी अपना हर फर्ज अच्छे से अदा करती है।

शादी से पहले नारी अपने माता पिता की सेवा करती है, ओर शादी के समय नारी अपना घर छोड़कर पराए घर में जाती है और उस घर को अपना घर बना लेती है। वो रोज सुबह सुबह उठकर घर की साफ सफाई करती है, घर में खुशहाली लाती है, नारी पूरे घर के सदस्यों का ख्याल अच्छे से रखती है।

भारत के विकास में नारी का योगदान-

भारत की कुल जनसंख्या में लगभग 39% कार्यशील जनसंख्या है, जिसमें लगभग एक-चौथाई महिलाएँ हैं। कृषि प्रधान भारत देश में कृषि कार्य में सक्रिय भूमिका अदा करते हुए स्त्रियाँ प्रारंभ से ही अर्थव्यवस्था का आधार रही हैं, लेकिन समाज में स्त्री की आर्थिक गतिविधियों को हमेशा से ही उचित रूप से मूल्यांकित नहीं किया गया है।

आधुनिक युग में कुछ समाज सुधारकों के प्रयास ने महिलाओं की स्थिति में धीरे धीरे सुधार लाना प्रारंभ किया, जिसके परिणाम से राष्ट्र की समुचित प्रगति में महिलाओं का नाम निरंतर आगे आ रहा है।

वर्तमान समाज में नारी का योगदान-

आज स्त्रियों ने अनेक सामाजिक आर्थिक कठिनाइयों को पार करते हुए नई नई बुलंदियों को छुआ है। घर की ज़िम्मेदारियाँ तो वे सदियों से निभाती आ रही हैं, अब उन्होंने स्वयं को बाहर की दुनिया में भी दृढ़ता से स्थापित किया है। चिकित्सा का क्षेत्र हो या इंजीनियरिंग का, सिविल सेवा का क्षेत्र हो या बैंक का, पुलिस हो या फौज़, वैज्ञानिक हो या खेल का क्षेत्र, प्रत्येक क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर स्त्रियां आज सम्मान के साथ आसीन हैं।

मैरी कॉम, किरण बेदी, कल्पना चावला, मीरा नायर, मीरा कुमार, मलाला यूसुफजई, मेनका गांधी, बछेद्री पाल, संतोष यादव, सानिया मिर्जा, सायना नेहवाल, पीटी उषा, कर्णम मल्लेश्वरी, पीवी सिंधु, गीता फोगट ओर अभी हाल ही में हुए टोक्यो 2021 में रजत पदक विजेता मीरा बाई चानू आदि की क्षमता एवं प्रदर्शन को भुलाया नहीं जा सकता। आज नारी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं और देश को आगे बढ़ा रही हैं।

सुभाषचंद्र बोस ने भी कहा है-

ऐसा कोई भी कार्य नहीं, जो हमारी महिलाएँ नहीं कर सकतीं और ऐसा कोई भी त्याग और पीड़ा नहीं है, जो वे सहन नहीं कर सकतीं

स्त्रियों की स्थिति में सुधार की आवश्यकता-

यद्यपि महिलाओं ने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की है, परंतु महिलाओं का अभी बहुत कुछ करना शेष है। आज भी स्त्री की उपेक्षा का सिलसिला उसके जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है। पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना के कारण हमें हर स्तर पर उनकी दशा सुधारने के लिए प्रयास करने चाहिए। आज भी अधिकांश भारतीय स्त्रियाँ वेतनभोगी होते हुए भी आर्थिक दृष्टि से पुरुषों पर आश्रित बनी हुई है।

उपसंहार – राष्ट्र निर्माण में नारी का योगदान-

सिर्फ कानूनी प्रावधान ही महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि लोगों की मनोवृत्ति में परिवर्तन लाने की भी अत्यंत आवश्यकता है । आवश्यकता इस बात की भी है कि भारतीय समाज महिलाओं को उनका उपयुक्त स्थान दिलाने के लिए आगे आए।

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