मीराबाई चानू के संघर्ष की कहानी – Mirabai Chanu Struggle Story

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Mira Bai Chanu Biography In Hindi

Mirabai Chanu Bio In Hindi

साइखोम मीराबाई चानू एक भारतीय महिला भारोत्तोलक (Weightlifter) है। मीराबाई का जन्म 8 अगस्त 1994 को इम्फाल, मणिपुर में हुआ था।

मीराबाई चानू की कहानी – MiraBai Chanu Story

मीराबाई ने अभी हाल ही में आयोजित हुए 2021 टोक्यो ओलंपिक में इन्होंने 49 kg वर्ग में रजत पदक (Silver Medal) जीता है। और पूरे देश का नाम रोशन किया है।

टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए भारोत्तोलन (Weightlifting) में सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू पहली भारतीय महिला है। मीराबाई चानू को भारतीय खेल में योगदान के लिए भारत सरकार से पद्म श्री एवं राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है।

साइखोम मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक में भारत की और से भाग लेने वाली एक मात्र वेट लिफ्टर थी, इन्होंने 49 kg वर्ग में सिल्वर मेडल जीता है, और वही गोल्ड मेडल जीता है चाइना की ज़िहुई होउ ने।

मीराबाई का प्रदर्शन टोक्यो में इस प्रकार रहा, पहला प्रयास में मीराबाई ने 84 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया और इसमें सफल रही, दूसरे प्रयास में मीराबाई ने 87 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया और वो इसमें भी सफल रही। परंतु तीसरे चरण में मीराबाई ने 89 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की ओर इसमें मीराबाई असफल हो गई।

मीराबाई ने क्लीन और जर्क श्रेणी में 115 किलोग्राम वजन उठाया, टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई का कुल स्कोर 87+115=202 किलोग्राम रहा और गोल्ड मेडल विजेता ज़िहुई होउ का कुल स्कोर 94+116=210 किलोग्राम रहा।

इसी साल अप्रैल में आयोजित हुए एशियन चैंपियनशिप में मीराबाई ने क्लीन एंड जर्क श्रेणी में 119 kg वेट लिफ्ट करकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।

मीराबाई भारत की दूसरी एथलीट है जिन्होंने वेट लिफ्टिंग में भारत के लिए कोई पदक जीता है। इससे पहले सन् 2000 में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता था, और ये भारत के लिए पहली वेट लिफ्टर थी जिन्होंने वेट लिफ्टिंग में भारत के लिए पहली बार कोई पदक जीता था। मीराबाई भारत की केवल दूसरी महिला है जिन्होंने वेट लिफ्टिंग में पदक हासिल किया है। मीराबाई नए पीढ़ी के लिए एक इंस्प्रेशन है।

Mira Bai Chanu Struggle Story – मीराबाई के संघर्ष की कहानी

मीराबाई ने टोक्यो में हुई अपनी जीत का श्रेय अपनी फैमिली, खासकर अपनी मां और अपने कोच रवि शर्मा को दिया।

मीराबाई ने अपनी जीत का श्रेय इंडियन रेलवे को दिया, मीराबाई इंडियन रेलवे की एथलीट है, इन्होंने रेलवे में चीफ टिकट इंस्पेक्टर के रूप में ज्वाइन किया था। सन् 2018 में इन्हे ऑफिसर बना दिया गया।

मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 20 km दूरी पर स्थित नोंगपोक काकचिंग गांव की रहने वाली है मीराबाई चानू, यहां इनका जन्म 8 अगस्त 1994 को एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम साइकोहं कृति मैतेई है जो की लोक निर्माण विभाग (PWD) में काम करते है, और इनकी माता का नाम साइकोहं ऊँगबी तोम्बी लीमा है जो की एक दुकान संभालती है।

मीराबाई बताती है कि उनके घर में चूल्हे पर खाना बनाया जाता था इसलिए मीराबाई जंगल में जाकर लकड़ियां लाती थी और वे उनके भाई के मुकाबले ज्यादा वजन उठाती थी।

मीराबाई वेट लिफ्टिंग के लिए कुंजरानी देवी से इंस्पायर्ड है, कुंजरानी देवी मणिपुर की एक फेमस वेट लिफ्टर है जिन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक जीते है। इन्ही को देखकर मीराबाई ने वेट लिफ्टिंग की ट्रेनिग ली थी।

मीराबाई को वेट लिफ्टिंग के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी, इनको अंतर्राष्ट्रीय कोच अनीता चानू ने इन्हें वेटलिफ्टिंग से परिचित करवाया, ट्रेनिंग सेंटर इनके गांव से 22 किलोमीटर की दूरी पर था और रोज इन्हें ट्रेनिंग सेंटर पर 6 बजे पहुंचना होता था, इसके लिए इन्हें सुबह-सुबह दो बस बदलकर जाना पड़ता था। रोज सुबह जाकर इन्हें प्रैक्टिस करनी होती थी।

लगभग 6 साल कड़ी मेहनत के बाद स्कॉटलैंड में आयोजित हुए 2016 में कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई ने सिल्वर मेडल जीता लिया था।

2016 में जब रियो में आयोजित हुए ओलंपिक में इन्होंने राष्ट्रीय सिलेक्शन ट्रायल में 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड दिया था, इसके बाद इन्हें सबसे अच्छा कैंडिडेट माना जा रहा था, परंतु जब इन्होंने वेट को लिफ्ट किया था तो जजेस का कहना था कि इन्होंने एक भी वेट लिफ्ट सही से नही किया था और इन्हे DNF (did not finish) के टैग के साथ घर लौटना पड़ा था। इनकी आंखों में उस समय आंसू थे इतनी मेहनत के बाद इतना खराब प्रदर्शन के बाद भी मीराबाई ने हार नहीं मानी और 1 साल बाद 2017 में अमेरिका वर्ल्ड चैंपियनशिप में इन्होंने गोल्ड मेडल जीता था।

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मीराबाई चानू के पुरुस्कार

ऑस्ट्रेलिया में 2018 में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई ने 48 वर्ग की श्रेणी में न केवल गोल्ड मेडल जीता था बल्कि सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

इन्हे साल 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी इन्हे सम्मानित किया जा चुका है।

तो ये थी मीराबाई चानू की कहानी आशा करते इस कहानी ने आपको कुछ करने के लिए प्रेरित किया होगा, ध्यान रखे जीवन में मुश्किल तो आती रहेगी पर आपको लगे रहना है, चाहे हो कुछ हो जाए।

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