जिंदगी में आगे कैसे बढ़े? – Jindagi Me Aage Kaise Badhe?

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Jindagi me aage kaise badhe

Jindagi Me Aage Kaise Badhe ?

आज हम आपको बताने वाले है, की आप आपके जिंदगी में कैसे आगे बढ़ सकते हो, कैसे आप और अच्छा कर सकते हो, कैसे आप जीवन में और उच्चाइयों को हासिल कर सकते हो।

हर कोई अपने जीवन में बोहोत कुछ हासिल करना चाहता है, पर कुछ ही लोग इस सफलता को प्राप्त कर पाते है।

पर एक बात हमेशा याद रखिए सफलता एक दिन में नहीं मिलती, सफलता है, लिए आपको लगातार मेहनत करते रहने है, ओर किसी भी हाल में हर नहीं मानना है, लगे रहो जब तक अपने सपने को हकीकत में ना बदल लो।

चाहे ये दुनिया आपके ऊपर विश्वास करे या ना करे, आपको अपने आप पर भरोसा होना चाहिए, की आप कुछ भी कर सकते हो।

पर अगर आप चाहते ही है, की आपको आपके जीवन में बदलाव लाना ही है, तो आप इन Tips को Follow जरूर करे, आपको अपने आप में बदलाव जरूर दिखेंगे।

जीवन में आगे कैसे बढे – Jivan Me Aage Kaise Badhe?

इन 5 Tips की मदद से आप जीवन में बोहोत कुछ हासिल कर सकते हो।

#1. लक्ष्य निर्धारण, (Set goals)

प्रत्येक व्यक्ति को, आप मे हर किसी को जिन्दगी में आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है, बिना लक्ष्य निर्धारण के व्यक्ति दर-दर भटकता रहता है, जब तक आपको यह पता नहीं कि आपकी मंजिल क्या है?,

आप क्या प्राप्त करना चाहते हैं? आपकी आकांक्षा क्या है? तब तक आपके द्वारा की गई कोशिश, बिना दिशा ज्ञान के चलने वाली नांव के समान है। ऐसी नांव जिसका नाविक बस निरंतर चलाता रहता है। वह कहां पहुंच गया या वापस वहीं आ गया, जहां से चला था, इसका उसे कुछ पता नहीं रहता।

आपना लक्ष्य तय करने के बाद से ही व्यक्ति उस लक्ष्य प्राप्ति हेतु गंभीरता से प्रयास करने लगता है।

अनेक व्यक्ति अपने सामने बहुत बड़ा लक्ष्य रखकर, उस लक्ष्य प्राप्ति हेतु पूरे लगन एवं निष्ठा के साथ स्वयं को उस काम में झोंक देते हैं। इनमें से कई व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति भी कर लेते हैं, जबकि कुछ असफल भी हो जाते हैं।

# लक्ष्य निर्धारण करने के बाद ही आप उस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपनी योग्यता और क्षमता को एक निश्चित दिशा में प्रयुक्त करना शुरू करते हैं।

# नीति निर्धारण से आपको एक निश्चित दिशा में कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।

# लक्ष्य निर्धारण से तात्पर्य है कि आपने उस लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास है।

# लक्ष्य निर्धारण करने के बाद ही आत्मविश्लेषण कर, स्वयं को उस लक्ष्य प्राप्ति हेतु तैयार करते हैं और स्वयं को अनुशासित कर, लक्ष्य प्राप्ति के पथ निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं।

# लक्ष्य निर्धारण के बाद आप योजना बनाकर बहुत समझदारी से, मेहनत से, लग्न एवं निष्ठा से उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

# लक्ष्य की प्राप्ति से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, सेम के प्रति सम्मान बढ़ता है, स्वयं की क्षमता एवं योग्यता पर विश्वास बनता है। आपमें और मेहनत करने की लगन पैदा होती है।

अतः लक्ष्मी धरण बहुत महत्वपूर्ण है, यहां जीत की राह का अहम पड़ाव है।

#2. संघर्ष का दौर – Struggling Phase

लक्ष्य तय करने के बाद, शुरू होता है आपका संघर्ष का दौर। आपने जो मंजिल तय की है, उसे प्राप्त करने हेतु आप अपनी पूर्ण शक्ति और लगन के साथ उस लक्ष्य को पाने के लिए जुट जाते हैं।

यहां वह दौर है, जिसमें व्यक्ति स्वयं की योग्यता एवं क्षमता का आकलन करता है। यहां ऐसा दौर होता है, जिसमे व्यक्ति स्वयं की इच्छाशक्ति, अपनी मेहनत करने की क्षमता एवं स्वयं के गुणों को पहचानता है।

इस दौर में व्यक्ति को स्वयं की कमियों तथा अक्षमताओं का ज्ञान होता है कि व्यक्ति जोश-जोश में लक्ष्य निर्धारित कर लेता है, वह बहुत उत्साह एवं उल्लास से सोच लेता है कि वह इस लक्ष्य को तो पार किसी भी परिस्थिति में कर ही लेगा।

और जब संघर्ष का दौर आता है, और वह स्वयं की योग्यता देखता है तो उसे पता चलता है कि वह क्या कर रहा है, जिस कार्य को वहां बहुत आसान समझता था, वही उसे बहुत कठिन लगने लगता है।

कुछ व्यक्ति संघर्ष के दौर में शुरू के कुछ दिन तक तो गंभीरता और अनुशासन, मेहनत कर प्रयास करता है, और बाद में फिर बिल्कुल ही आलसी हो जाते हैं, वह उस कार्य को करने की लगन ही नहीं रखते हैं, और फिर उदास और हताश होकर बैठ जाते हैं।

यह कठिनाइयों और समस्याओं से मुकाबला करने का दौर है। इस दौर में बहुत आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

यहां एक ऐसा दोर है, जब व्यक्ति बहुत धैर्यपूर्वक, पूर्ण लगन, सकारात्मक सोच, एवं निष्ठा से परिश्रम करनेवाले ही आगे बढ़ सकते हैं।

इस दौर में आने वाली कठिनाइयों से घबराना नहीं है। आपको सकारात्मक दृष्टिकोण से आशावादी होकर आगे बढ़ना है।

छोटी-मोटी असफलताएं आपको मार्ग से विचलित ना कर दे, इसका ध्यान रखें। विजय पथ पर, कई बार पराजय होती है, लेकिन जो पराजित होकर बैठ गया, वहां कभी विजेता नहीं बन सकता।

असफलताओं से सीखे एवं अपनी कमियों को दूर करें।

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#3. जीत का दौर – Success

यह वह समय है, जब आप निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर चुके होते हैं, इस दौर में आप हर्ष, उल्लास, आत्मविश्वास से भरे होते हैं। आप स्वयं की योग्यता पर नाज कर रहे होते हैं।

यहां दौर विजेता की तरह खुश होने का, गर्व करने का है। जीवन में जीत दर्ज करना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो आकस्मिक नहीं मिलता, इसके लिए बहुत त्याग और तपस्या की आवश्यकता होती है। व्यक्ति को अपनी जीत की खुशी अवश्य माननी चाहिए।

खुशी मनाने का अर्थ, सार्वजनिक रूप से किसी तरह की पार्टी (party) आदि से नहीं, बल्कि अपनी ‘जीत’ के मार्ग में आने वाली समस्याओं एवं आपके द्वारा उनका किए गए निराकरण से संबंधित अनुभवों को अपने ही कुछ खास मित्रों एवं परिवारजनों के साथ बांटने से है।

यह जीत की पार्टी आपको आगे बढ़ने को प्रेरित करेगी। अपने मित्र एवं परिवारजनों की बधाइयां आपको और ऊंचे लक्ष्य प्राप्त करने को प्रेरित करती है।

एक शानदार, हर्ष एवं आनंद से भरपूर दौर में आप स्वयं को आत्मविश्वास से ओत-प्रोत पाते हैं।आप में कुछ और बड़ा कार्य करने की इच्छा शक्ति जागृत होती है। यह  जीत का दौर आप को और अधिक बड़े लक्ष्य को हासिल करने हेतु प्रेरित करता है।

#4. जीत बरकरार रखने का दौर – Success Phase

जीत हासिल करने के बाद यहां दौर बहुत महत्वपूर्ण दौर है जीवन में जितना महत्व ‘जीत’ का है, उससे भी अधिक महत्व इस जीत को बरकरार रखने का है।

एक ऊंचाई प्राप्त करने के बाद, उससे और ऊपर चढ़ना तो हमें अच्छा लगता है, लेकिन उस स्तर पे नीचे यदि उतरना पड़े, तब बहुत पीड़ादायक स्थिति बन जाती है।

आपने बहुत लगन, निष्ठा और मेहनत से एक स्तर को पार किया है। एक जीत दर्ज करके, एक मंजिल तय की है। अब आपका प्रयास ना केवल उस स्तर को बरकरार रखने का होना चाहिए, बल्कि उस स्तर से ऊपर के स्तर और नई बुलंदियों को तय करने का होना चाहिए।

जब आप नई बुलंदियों को छूने हेतु प्रेरित नहीं होते, तब तक आपको प्राप्त ऊंचाई को खोने का डर बना रहेगा। अतः आवश्यक है कि आप अपनी इच्छा शक्ति को और आगे बढ़ाने हेतु बनाए रखें।

ध्यान रखें, सफलता एक गंतव्य ना होकर, लगातार जारी रहने वाली एक यात्रा है, जिसमें यात्री आगे-से‌-आगे बढ़ता जाता है। थककर, यह संतुष्ट होकर बेठना सफलता नहीं है।

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#5. लक्ष्य का पुनः निर्धारण – Set New Goals

आपने जो सफलता अर्जित की है, वह बहुत महत्वपूर्ण है। अपनी जीत पर आप स्वयं गर्व महसूस करते हैं, अच्छी बात है, लेकिन जैसा हमने स्पष्ट किया है, सफलता का दौर, एक ऐसा दौर है, जो लगातार आपका ध्यान अपनी और ही रखना चाहता है।

बहुत से व्यक्ति, शिखर छूने के बाद संतुष्ट होकर बैठ जाते हैं, और निष्क्रिय से हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति कुछ दिनों बाद अन्य लोगों से पिछड़ जाते हैं।

सफलता कोई मंजिल नहीं, बल्कि सापेक्षिक रूप से अन्य से आगे बढ़ना है।

अपने लक्ष्य का पुनः निर्धारण करें एवं उस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु प्रयास शुरू करें, एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए सारी शक्तियौ, योग्यताओं, एवं क्षमताओं को एकत्रित कर उस लक्ष्य प्राप्त करने हेतु जुट जाएं। पुनः वही दौर शुरू होगा जहां से आप आगे बढ़े हो।

जीत की मंजिल के पड़ाव वही रहेंगे, लेकिन मंजिलें बदलती रहेगी

संघर्ष लगातार जारी रहेगा, जीत पुनः दर्ज होगी एवं लक्ष्य का पुनः निर्धारण होगा। यही है जीत की राह।

तो ये थे कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत, आशा करते है, ये आपके लिए मददगार साबित हुए होंगे।

अगर आपको ये पसंद आया हो, तो अपने दोस्तो के साथ जरूर Share करे ताकि वो भी कुछ नया सीख सके और अपने जीवन में बदलाव कर सके ।

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