गणेश चतुर्थी से जुड़े 10 अनोखे तथ्य – Facts On Ganesh Chaturthi 2021

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Facts On Ganesh Chaturthi 2021

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध त्यौहार है, गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा (गणेश जी) का सभी धर्म के लोग बड़ी धूम धाम से स्वागत करते हैं। भारत के सभी हिस्सों में बप्पा का स्वागत किया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र राज्य में गणेश जी का स्वागत देखने लायक होता है महाराष्ट्र के पुणे का गणेशोत्सव जगत्प्रसिद्ध है। शिवपुराण के अनुसार इस दिन पार्वतीनंदन गणेश जी का जन्म हुआ था। इन दिनों बहुत प्रमुख जगहों पर गणेश जी की बड़ी विशाल प्रतिमा स्थापित की जाती है।\

गणेश चतुर्थी पर 10 तथ्य –

#1. गणेश चतुर्थी हिंदुओ का प्रसिद्ध त्योहार है, जो की बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। सभी भक्त बप्पा का स्वागत ढोल नगाड़े बजाकर नाचते हुए करते है, लोग बड़ी धूम धाम से बप्पा का स्वागत करते है। और बप्पा के मंडप को फूलों और लाइटों से सजाया जाता है।

#2. शिवपुराण के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का जन्मदिवस बताया गया है, इस दिन ऐसा बताते है कि इन 10 दिनों तक भगवान गणेश स्वयं पृथ्वी पर आकर अपने भक्तो के साथ रहते है।

#3. रोजाना सुबह शाम बप्पा की विशाल आरती होती है, और बप्पा को प्रसाद के रूप में मोदक और लड्डू का भोग चढ़ाया जाता है। जिसमे बड़ी संख्या में आस पास के लोग आरती में सामिल होते हैं।

#4. यहां 10 दिवस का एक विशाल महोत्सव होता है। जिसे लोग त्यौहार की तरह मानते है।

#5. गणेश हिंदूओ के आराध्य देव है हिंदू धर्म में गणेश जी को एक विशेष स्थान प्राप्त है, सभी प्रकार के धार्मिक उत्सव जैसे यज्ञ, पूजन आदि में गणेश जी की आराधना सबसे पहली की जाती है।

#6. भगवान गणेश सुख, समृद्धि, बुद्धि का प्रतीक है। इस कारण हम जब भी कोई नया कार्य शुरू करते है तो गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है।

#7. गणेश चतुर्थी का उत्सव यूं तो संपूर्ण भारत में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में गणेश जी आगमन बड़े उत्साह से किया जाता है।

#8. गणेश चतुर्थी के दिन लोग बप्पा को अपने घर लाते है और उनका स्वागत बड़ी धूम धाम से करते है। इसके अलावा गणेशोत्सव का आयोजन सार्वजनिक जगहों पर किया जाता है।

#9. मराठा पेशवाओं ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया था, मराठा राजा शिवाजी महाराज गणेश जी के भक्त थे।
पहले गणेश जी की पूजा केवल अपने अपने घरों में होती थी, देश की आजादी के समय बाल गंगाधर तिलक ने सभी धर्मो के लोगो को एकत्रित करने के लिए गणेशोत्सव का आयोजन किया था, जिसमे सभी धर्म, जाति के लोग हजारों की संख्या में एकत्रित होते थे, और वो एक जरिया बना देश की आजादी के लिए। और इस वर्ष के बाद से ही प्रतिवर्ष गणेशोत्सव आयोजित होने लगा।

#10. लोग 9 दिनों तक अपने घरों और मंदिरों में बप्पा की खूब सेवा करते है, और 10 वे दिन जिसे अनंत चतुर्थी कहते है इस दिन लोग डोल नगाड़े और बाजे बजाते हुए गणेश जी की प्रतिमा को “गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ” बोलते हुए गणपत जी का किसी नदी या तालाब आदि जल में विसर्जित किया जाता है।

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