दिवाली क्यों मनाते है? दिवाली केसे मनाते है? दिवाली का महत्व 2021

दिवाली! यह हिंदू धर्म का सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है, जो वर्ष के अक्टूबर-नवंबर माह में आता है, जिसमें परिवार के सभी लोग धन, सुख व ज्ञान प्राप्ती के लिए माता सरस्वती, माता लक्ष्मी, श्री गणेश व कुबेर जी की पूजा, अर्चना करते हैं, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दिवाली भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दिवाली को लोग बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

#दिवाली का महत्व

त्रेतायुग में दिवाली!

दिवाली! कहा जाता है। जब त्रेतायुग में राजा दशरथ द्वारा दिए गए 14 वर्ष के वनवास को पूरा कर व रावण का अंत कर भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण व‌ माता सीता के साथ अपने घर अयोध्या नगरी लौट रहे थे, तब अयोध्यावासी ने भगवान श्री राम के स्वागत में घर-घर दिए जलाए, और उनके आगमन को एक उत्सव की तरह मनाया, उस दिन अयोध्या नगरी दिए की लो से जगमगा उठी थी। तभी से यहां दिन दिवाली/दीपावली के रूप में मनाया जाता है। ‌दिवाली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है, भगवान श्रीराम ने लंकेश्वर रावण का अंत कर बुराई पर अच्छाई की जीत प्राप्त की थी।

द्वापर युग में दिवाली!

दिवाली! भारत के सबसे बड़े महाकाव्यों मैं से एक है, महाभारत के अनुसार द्वापर युग में पांडव 12 वर्ष का वनवास व 1 वर्ष का अज्ञातवास पूरा कर अपने घर हस्तिनापुर लौट रहे थे, इस खुशी में हस्तिनापुर वासियों ने पांडवों के आगमन पर खुशियां मनाई, दीप जलाएं एवं हस्तिनापुर को अच्छी तरह सजाया तभी से देश में दीपावली मनाई जाती है।

दक्षिण भारत में दिवाली का महत्व!

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दिवाली नरकासुर के वध के कारण मनाई जाती है, नरकासुर एक राक्षस था, जिसने इंद्र की मां का ताज चुरा लिया था, इंद्र भयभीत होकर भगवान श्री कृष्ण से सहायता प्राप्त करने के लिए जाते हैं, और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वह इस दुविधा से उनको बाहर निकाले, भगवान श्री कृष्ण सत्याभमा के साथ स्वर्ग जाते हैं, व नरकासुर के वध के लिए तैयार रहते हैं, परंतु नरकासुर को वरदान प्राप्त था कि उनकी मां के हाथों से ही उनकी मृत्यु हो सकती है, जब भगवान श्री कृष्ण को पता चलता है कि सत्याभमा और कोई नहीं नरकासुर की मां ही थी, तब नरकासुर सत्यभामा के हाथों मारा जाता है, और श्री कृष्ण खोया हुआ ताज इंद्र की मां को लौटा देते हैं। बुराई पर हुई इस जीत के कारण दक्षिण भारत में दीवाली मनाई जाती है।

सिख धर्म में दिवाली का महत्व!

सिख धर्म में भी दिवाली का अत्यंत महत्व है दिवाली के दिन ही सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोविंदजी व 52 अन्य राजाओं के साथ ग्वालियर के कारागृह से 1619 ई. में रिहा हुए थे, तब सिखों ने बड़ी धूमधाम से दिवाली का त्यौहार मनाया था, और दिवाली के दिन ही सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर/गोल्डन टेंपल की नींव रखी गई थी।

#धनतेरस:

धनतेरस क्या है व इसे कैसे मनाते है?
What is Dhanteras and how is it celebrated?

धनतेरस को कार्तिक माह की त्रयोदशी या दिवाली के 2 दिन पहले मनाया जाता है, पौराणिक कथा के अनुसार धनतेरस भगवान धन्वंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष में भी मनाया जाता है। इस दिन को सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है, धनतेरस के दिन सोने-चांदी आदि की वस्तुएं, आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है, धनतेरस के दिन से ही घरों में दीप जलाए जाते हैं। इस दिन लोग सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन व सिक्के खरीदते हैं, बच्चे, बूढ़े सभी उम्र के लोग आज नए-नए कपड़े खरीदते हैं। पटाखे खरीदते हैं, और ज्यादातर लोग इसी दिन घर से संबंधित सामान जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन, टीवी, व यातायात से संबंधित कार, बाइक व अन्य यातायात के साधन खरीदते हैं।

#दिवाली/दीपावली:

दिवाली केसे मनाते है?
How do you celebrate Diwali?

दिवाली के दिन अंतरिक्ष से भारत का एक अलग ही स्वरूप दिखाई देता है, घर में हर जगह दिए व भिन्न-भिन्न कलर की लाइटें लगाई जाती है जो घर को जगमगा देती है, घर के आंगन में रंगोलीया बनाई जाती है। बच्चे पटाखे फोड़ते हैं, और इस उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

दीपावली से कई हफ्ते पहले घर के लोग घर, ऑफिस, अपनी गाड़ियां एवं निजी वस्तुओं की साफ-सफाई में जुट जाते हैं। घर में कई तरह की मिठाइयां व अन्य सामग्री बनाई जाती है। घर को नए कलर से पोता जाता है, सभी लोग अपने लिए नए-नए कपड़े खरीदते हैं, बच्चे पटाखे जलाते हैं। लोग आपस में मिलते हैं और अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। एक दूसरे को मिठाइयां अन्य सामग्री गिफ्ट देते हैं।

रात के समय परिवार के सभी लोग एकत्रित होकर माता लक्ष्मी, ज्ञान की देवी माता सरस्वती, श्री गणेश व कुबेर जी के साथ-साथ अपने धन की पूजा करते हैं, और उनसे सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके बाद लोग अपने संसाधनों की पूजा करते हैं। आज ही से हिंदुओं का नया वर्ष भी प्रारंभ होता है।

#गोवर्धन पूजा:

गोवर्धन पूजा क्या है व इसे कैसे मनाया जाता है?
What is Govardhan Pooja and how is it celebrated?

गोवर्धन पूजा के दिन गाय माता की पूजा की जाती है, इसके साथ साथ अन्य पशु भैंस, बेल की भी पूजा की जाती है। भारत के इतिहास में गाय माता को बहुत पवित्र माना गया है। गाय को माता लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा जाता है।
जब इंद्र के क्रोध से बृजवासी को भगवान श्री कृष्ण ने मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली से उठाकर बृजवासी, गायों को शरण देकर उन्हें बचाया था। तथा इंद्र का अभिमान चूर-चूर कर दिया था। तभी से इस दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाते हैं, जिसमें गोबर से गोवर्धन पर्वत, गाय, भगवान कृष्ण, ग्वाले, सभी को गोबर द्वारा बनाकर उनकी पूजा की जाती है।

#भाई दूज:

भाई दूज क्या है व इसे कैसे मनाते है?
What is brother duo and how do it celebrate?

भाई दूज! भाई दूज को भाई-बहन का एक पवित्र दिन भी माना जाता है। इस दिन भाई अपनी वैवाहिक बहन यह मुंह बोली बहन के यहां भोजन करने के लिए जाते हैं व दोनों के बीच में स्नेह बढ़ता है। बहन अपने भाई की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती है

बताया जाता है कि भगवान सूर्यदेव की पत्नी छांया के दो पुत्र-पुत्री थे यमुना और यमराज, यमुना अपने भाई यमराज से अति स्नेह करती थी एवं वहां तत्पर रहती थी कि यमराज उनके यहां आएं और भोजन करें, परंतु यमराज हमेशा व्यस्त रहते थे वे आ नहीं सकते थे। एक दिन अमावस्या की दूज के दिन बहन यमुना ने देखा कि यमराज उनके घर के द्वार पर खड़े थे, उन को देखकर यमुना बेहद खुश हो गई एवं उनका सादर सत्कार करने लगी यमराज को भोजन करवाया। और यमराज के जाते समय यमुना ने एक वचन मांगा कि वहां हर साल कार्तिक माह की अमावस की दूज के दिन उनसे मिलने आएंगे। तभी से इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।

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