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भारतीय किसान पर निबंध 1000 शब्दो में / Indian Farmer Essay In Hindi

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Indian Farmer Essay In Hindi: हमारा भारतवर्ष एक कृषि प्रधान देश है, यहां के ज्यादातर लोग केवल कृषि पर आश्रित है, आज हम आपको भारतीय किसानों का महत्व, भारतीय किसानों का जीवन, भारतीय किसान की समस्या, ओर भी कई भारतीय किसानों से जुड़ी जानकारी देंगे।

भारतीय किसान पर निबंध – Indian Farmer Essay In Hindi

Indian Farmer Essay In Hindi

भारतीय किसान का महत्व

जैसा कि हम जानते हैं भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां की लगभग 70% आबादी कृषि पर आधारित है। भारतीय किसान अपने खेतों में दिन रात मेहनत कर अन्न पैदा करता है। और लोगों का पेट भरता है। लोगों का अन्नदाता किसान है, इसलिए गांधीजी ने भारत के गांव को भारत की आत्मा और भारतीय संस्कृति को ‘कृषक संस्कृति’ कहा है।

भारतीय किसान का जीवन

भारतीय किसान की दिनचर्या एक साधक की तरह होती है, बाहर की दुनिया को त्यागकर वह केवल अपनी रोजमर्रा की दुनिया में उलझा रहता है, वह रोज जल्दी उठकर अपने खेतों पर निकल जाता है, चाहे ठंड हो या कड़कती धूप, दिन भर कड़ी मेहनत करता है, ओर शाम को अंधेरा होने के बाद घर लौटता है, खासकर सर्दियों में किसानों को रात भर जागकर अपने खेतों में सिंचाई करनी होती है, जहां दुनिया रात में सोती है, वहीं उनका पालनहार कड़कड़ाती सर्दी में खेतों पर सिंचाई करता है।

जहां लोग AC में बैठते है, वहीं किसान कड़कती धूप में खेत जोतता है, चाहे आंधी आये या तूफान किसान सीना ताने मजबूती से खड़ा रहता है, ओर लोगो का पेट भरता है। लोग जहां बड़े बड़े घरों में रहते है, वही किसान आज भी कच्चे घरों में रहते है। और सादा सूखा खाकर अपना पेट भरते हैं।

किसान दिवस

किसान दिवस प्रतिवर्ष 23 दिसंबर को किसानों के मसीहा और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है, चौधरी चरण सिंह किसानों के सर्वमान्य नेता थे, जो किसानों के हित में काम करते थे, चौधरी चरण सिंह की मेहनत के कारण ही सन् 1952 में ‘‘जमींदारी उन्मूलन विधेयक” पारित हुआ था। जिसमे देश के किसानों ओर राज्य के बीच पुनः सीधे संबंध स्थापित हुए थे। चौधरी चरण सिंह का मानना था कि खेती केन्द्र साशन का बहुमूल्य केंद्र है, इसलिए किसान के साथ कृतज्ञता से पेश आना चाहिए और उसके श्रम का प्रतिफल उन्हें अवश्य मिलना चाहिए।

भारतीय किसान की समस्या

भारतीय किसानों कि इस दयनीय दशा के कई कारण हैं-
जिसमें प्रमुख –

1. फसल की कीमत

किसान दिन रात कड़ी मेहनत कर आनाज उगाता है, किंतु उन्हें उनकी फसल का उच्च मूल्य नहीं मिलता है, जिस प्रकार व्यापारी अपने उत्पादों का एक निश्चित मूल्य तय करते हैं, और उसी मूल्य में उस वस्तु को बेचते हैं, परंतु अनाज उगाने वाला किसान अपनी फसलों का मूल्य खुद तय नहीं करता है, बल्कि व्यापारी तय करते हैं। जिसके कारण किसानों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

2. किसानों पर कर्ज

भारत के ज्यादातर किसान आज भी कर्ज में डूबे है, वे प्रत्येक वर्ष महंगे भाव में खाद व बीज खरीदते है, ओर उनका इस्तेमाल करते है, जिसके कारण उनके सिर पर कई सारा कर्ज इक्कठा हो जाता है, ओर चूंकि किसानों की फसल का भाव उतना नहीं आता है, ओर कई बार प्रकृति के प्रकोप के कारण किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाती है, जैसे सर्वाधिक ठंड के कारण कई बार फसल जल जाती है, अधिक पानी गिरने के कारण फसलें खराब होने लगती है, और कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी फसलें खराब हो जाती है, चूंकि किसानों के पास आमदनी का एक ही जरिया होता है, ओर वो भी नष्ट हो जाता है, जिस कारण किसान अपना कर्ज चुका नही पाता जिसके कारण हजारों किसान प्रतिवर्ष आत्महत्या कर लेते है।

3. शिक्षा और पूंजी का अभाव

शिक्षा और पूंजी (धन, पैसे) के कमी के कारण किसान समय पर फसलों में खाद्य, सिंचाई और दवा का प्रयोग नहीं कर पाते, अशिक्षित होने के कारण यह कृषि के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत नहीं है, जिसका सबसे बुरा असर कृषि पर पड़ता है।

4. सरकार भी कर रही है प्रयास

आज भी ज्यादातर किसान अशिक्षित है, जिस कारण उन्हें आधुनिक खेती की जानकारी कम है, जिस कारण वह आधुनिक खाद व नई तकनीक का प्रयोग नही कर पाते है, जिस कारण सरकार किसानों को आधुनिक कृषि के बारे में जानकारी दे रही है, ओर उन्हें डिजिटल बनाने का प्रयास कर रही है,

5. किसान खेती को उत्तम नही मानते

जहां एक डॉक्टर अपने बेटे या बेटी को डॉक्टर बनाना चाहता है, वकील अपने बेटे या बेटी को वकील बनाना चाहता है, ओर एक इंजिनियर अपने बेटे या बेटी को इंजिनियर बनाना चाहता है, परंतु देश का पेट पालने वाला किसान अपने बेटे को किसान बनाना नहीं चाहता है, वह अपने बेटे को पड़ा-लिखा कर डॉक्टर या इंजिनियर बनाना चाहता है किंतु किसान नही क्योंकि वह नहीं चाहता की जो जिंदगी उन्होंने जी है वह उनके बेटे को मिले।

इसके अलावा बाढ़ सूखा आदि एवं प्राकृतिक आपदाएं भी किसानों की दुर्दशा का प्रमुख कारण है।

भारत में किसानों की संख्या कितनी है-

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development) (नाबार्ड) की एक रिपोर्ट के अनुसार 10.07 करोड़ परिवार कृषि पर निर्भर है, यह संख्या देश के कुल परिवारों की 48 फीसदी है। जबकि एक कृषि आधारित परिवार में वर्ष 2016-17 में औसतन सदस्य संख्या 4.9 थी।हालांकि अगल-अलग राज्यों में सदस्य की संख्या भी अलग है। जेसे मध्यप्रदेश में औसतन 4.5 सदस्य, पंजाब में 5.2, बिहार में 5.5, हरियाणा में 5.3, उत्तर प्रदेश में 6, मणिपुर में 6.4 आदि।

किसान पर निबंध 10 लाइन

किसान पर निबंध 10 लाइन

1. किसान प्रत्येक देश का पालनहार होता है।
2. किसान दिन रात मेहनत कर अन्न पैदा करता है, और लोगों का पेट भरता है।
3. किसानों की कमाई पर देश की खुशहाली निर्भर करती है।
4. किसान गाँव में रहते है और बहुत ही सरल जीवन व्यतीत करते है।
5. किसान हर मौसम में काम करते हैं, चाहे बारिश का मौसम हो, सर्दी का मौसम हो या गर्मी का मौसम।
6. भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है
7. भारत ने प्रतिवर्ष 23 दिसंबर को भारतीय किसान दिवस मनाया जाता है।
8. भारत की कुल 10.07 करोड़ परिवार कृषि पर निर्भर है।
9. किसान भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है।
10. किसान अन्न उगाता है और हम सबका भरण पोषण करता है।

किसान पर कविता

देख कलेजा फाड़ कृषक दे रहे हृदय शोणित की धारें।
बनती ही उन पर जाती है, वैभव की ऊंची दीवारें॥

जेठ हो कि पूस, हमारे कृषकों को आराम नहीं है,
छुट बैल का संग, कभी जीवन में ऐसा चाप नहीं है।
मुख में जीभ, शक्ति भुज में जीवन में सुख का नाम नहीं है,
वसन कहां, सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं है।

निष्कर्ष – Bhartiya Kisan Par Nibandh

कृषि प्रधान देश में कृषक ही देश के कर्ता-धर्ता है, किसानों की उन्नति के बिना देश की प्रगति की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इसलिए हमारे प्राचीन इतिहास में भी कृषि को उत्तम कार्य माना गया है, लेकिन आज के समय में कृषि के कार्य को हेय दृष्टि (बुरी निगाह, खराब नजर) से देख जाता है,

आज आवश्यक है कि किसानों के आर्थिक विकास के साथ-साथ इनके सामाजिक स्तर को भी ऊंचा उठाया जाए।

FAQs

किसान दिवस कब मनाया जाता है?

किसान दिवस 23 दिसंबर को मनाया जाता है।

किसानों के सर्वमान्य नेता कौन थे?

किसानों के सर्वमान्य नेता चौधरी चरण सिंह थे।

भारत की कुल कितनी आबादी कृषि पर निर्भर है?

भारत की कुल 10.07 करोड़ परिवार कृषि पर निर्भर है।

अन्य पढ़े-

Chia Seeds Benefits in Hindi। चिया सीड्स के फायदे और नुकसान

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चिया सीड्स इन हिंदी, चिया सीड्स के उपयोग,(chia seeds benefits in hindi) (Chia Seeds in hindi)

चिया सीड्स जोकि काले, भूरे व सफेद रंग के होते है, इन बीज को साल्विया हिस्पैनिका के नाम से भी जाना जाता है, इन बीजों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस और कैल्शियम की होता है इस कारण इसे सुपर फूड की श्रेणी में रखा गया है।

चिया सीड्स क्या है? What is Chia Seeds?

Chia Seeds Benefits In Hindi

चिया सीड्स जिसे हिंदी में चिया बीज भी कहा जाता है, यह बीज केवल मेक्सिको में पाये जाते है, जोकि काले, भूरे व सफेद रंग के होते है, व इनके फुल बैंगनी और सफेद रंग के होते है। चिया बीज में भर पूर मात्रा में ओमेगा-3 फेटी एसिड पाया जाता है इसलिए इसे सुपर फूड (super food) की श्रेणी में रखा जाता है।

चिया सीड्स का हिंदी नाम क्या है? What is the Hindi name of Chia Seeds?

चिया सीड्स को हिंदी में चिया बीज के नाम से जाना जाता है, इसके अलावा इसका कोई हिंदी नाम नही है क्योंकि यह बीज भारत में नही पाए जाते है. यह बीज केवल अमेरिका के मेक्सिको शहर में पाए जाते है।

चिया सीड्स का वैज्ञानिक नाम क्या है? 

चिया सीड्स को हम चिया बीज के नाम से भी जानते है, लेकिन इसका वैज्ञानिक नाम साल्विया हिस्पैनिका (Salvia hispanica) है।

चिया सीड्स के उपयोग – Uses of Chia Seeds

  1. चिया सीड्स एंटी इन्फ्लैमटॉरी (Anti Inflammatory) हैं, जिसका सेवन करने से कैंसर और हृदय रोग जैसी अन्य बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है।
  2. चिया सीड्स के सेवन से डिप्रेशन, दिमागी टेंशन, काम में मन न लगना, ओर माईग्रेन जेसी बीमारी खत्म हो जाती है।
  3. चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है, जिससे बालों का गिरना कम हो जाता है, ओर बाल घने और लंबे हो जाते है।
  4. चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फेटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन A, विटामिन K, कार्बोहायड्रेट और भी कई मिनरल्स होते है, जोकि शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है।
  5. चिया बीज ठंडा होता है, इसलिए इसका उपयोग गर्मियों में बहुत से ड्रिंक और फालूदा बनाने में उपयोग किया जाता है।
  6. Chia Seeds में कई पाचक एंजाइम होते हैं, जोकि पाचन तन्त्र (Digestive system) को स्वस्थ और मजबूत रखता है।
  7. चिया सीड्स का उपयोग वजन कम (Weight Loss) करने में भी किया जाता है, इसमें काफी मात्रा में फाइबर होता है, जिससे बहुत समय तक भूख नहीं लगती है, जिससे आसानी से वजन कम होता है।
  8. चिया सीड्स का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती है, क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में कैल्शियम होता है।
  9. चिया सीड्स खून में शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है। यह शरीर की इन्सुलिन की तरफ प्रतिक्रिया को कम करता है।
  10. चिया सीड्स के सेवन से मधुमेह (Diabetes) की संभावना कम होती है।

चिया सीड्स के फायदे! Benefits of Chia Seeds

Chia Seeds Benefits In Hindi
  1. चिया सीड्स का सेवन करने से हड्डियां व दांत मजबूत होते है।
  2. चिया सीड्स का सेवन करने से दिमाग तेज चलता है।
  3. चिया सीड्स के सेवन से वजन कम (weight loss) होता है।
  4. चिया सीड्स के सेवन से मधुमेह (Diabetes) नही होती है।
  5. चिया सीड्स के सेवन से हृदय रोग जैसी अन्य बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है।
  6. चिया सीड्स के सेवन से डिप्रेशन कम होता है।
  7. चिया सीड्स के सेवन से पाचन क्रिया मजबूत होती है।
  8. चिया सीड्स के सेवन से बालों का झड़ना कम हो जाता है।
  9. चिया सीड्स के उपयोग से शरीर में ताजगी बनी रहती है।
  10. चिया सीड्स खून में Sugar लेवल को कम करने में मदद करता है।
  11. चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होते है जो स्किन के लिए काफ़ी लाभकारी होते हैं। चिया सीड्स का पेस्ट बनाकर मुंह पर लगाने से यह पिंपल्स और टैनिग को दूर करता है।
  12. चिया बीज के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है।
  13. चिया बीज से कोलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है।
  14. चिया सीड्स के सेवन से अच्छी नींद मिलती है।
  15. चिया सीड्स के सेवन से शरीर में ऊर्जा प्राप्ति करने में मदद मिलती है।
  16. चिया सीड्स खाने से कब्ज से राहत मिलती है और पाचन तंत्र अच्छा हो जाता है।
  17. चिया सिड्स के सेवन से कैंसर रोग का उपचार किया जा सकता है।

Nutritional Value In Chia Seeds (1Tbsp)

Calories53
Total Fats3.3 g
Omega-3 fat1.9 g
Protein1.8 g
Carbohydrates4.6 g
Fibre3.7 g
Calcium68 mg
Magnesium36 mg
Selenium6 mcg
Zinc0.5 mg
Source – Canadian Nutrient File, 2015

चिया सीड्स का खाने का तरीका! How to eat chia seeds?

चिया सीड्स को हमेशा खाने से पहले इसे करीब 1 से 2 घंटे तक भिगोकर रख दे, इसको हमेशा भिगोकर ही खांये, याद रखें की बीज पूरी तरह से पानी-पानी ना हो और उसे दबाने पर जेल के जैसा दिखना चाहिए। चिया बीज की एक ख़ास बात यह है की यह अपने से 15 प्रतिशत ज्यादा पानी सोंक लेता है जिससे शरीर में निर्जलीकरण(Dehydration) की समस्या नहीं होती।

अगर आप चिया सीड्स को पहली बार खा रहे है तो आप इसका सेवन कम से कम करे, शुरुवात में इसे खाना आदी चम्मच से शुरू करे, बाद में आप इसकी मात्रा बड़ा सकते है।

चिया सीड्स का सेवन आप इस तरह कर सकते हैं – You can consume chia seeds in this way –

भीगे हुए चिया सीड्स को आप एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पी सकते हैं, पानी में चिया सीड्स की मात्रा केवल एक चम्मच की होनी चाहिए। इस ड्रिंक को आप दिन में कभी भी ले सकते हैं, इस ड्रिंक को आप अपने डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं।

चिया सीड्स को आप दही के साथ मिलाकर भी इसका सेवन कर सकते है, इसमें आप शक्कर की जगह शहद या खजूर का उपयोग भी कर सकते हैं।

चिया सीड्स को भिगोने पर यह अपने आकार से 10 गुना बड़े हो जाते है, क्योंकि यह पानी को अपने अंदर अब्सोर्ब कर लेता है, जिससे इसे खाने पर लंबे समय तक भूख नही लगती जिससे वजन कम करने में आसानी होती है।

चिया सीड्स को दूध में मिला कर भी पिया जाता है, इससे शरीर को प्रोटिन अधिक मिलता है, जिससे मसल्स इनक्रीस होती है, इसके अलावा चिया सीड्स को सलाद में मिलाकर भी खाया जाता है, आप चाहे तो चिया बीज को पीसकर भी खा सकते है।

आप Chia Seeds को किसी भी तरल पदार्थ जैसै बादाम के दूध या नारियल के दूध या किसी फल के रस में मिला कर पी सकते हैं।

चिया सीड्स के सेवन से होने वाले नुकसान – Disadvantages of consuming Chia Seeds

Chia Seeds Benfits In Hindi

चिया सीड्स खाने के वैसे तो कई फायदे है लेकिन इसके कई नुकसान भी होते है।

1. चिया सीड्स को कभी भी अधिक मात्रा में न खाए इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में कई साइड इफेक्ट दिखते है, जेसे एलर्जी, शरीर में दाने आना, उल्टी और दस्त आदि। इसका हमेशा 1 से 2 चम्मच ही सेवन करना चाहिए।

2. क्योंकि चिया सीड्स में फाइबर अधिक मात्रा में होता है, इस कारण पतले लोगो को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

3. चिया सीड्स पानी को ज्यादा अबसर्व करता है, इसलिए आप जब भी चिया सीड्स को खाए तब जितना हो सके उतना अधिक पानी पिये।

4. ओमेगा-3 फेटी एसिड वैसे तो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है लेकिन यह खून को पतला कर देता है, अगर आप पहले से खून पतला करने की किसी प्रकार की दावा का उपयोग कर रहे हो, तो चिया सीड्स का उपयोग बिलकुल न करें, ओर अगर किसी दुर्घटना या सर्जरी में किसी का बहुत खून निकल जाता है वहां भी चिया सीड्स का उपयोग न करें।

5. चिया सीड्स को 1 से 5 साल तक के बच्चो को और गर्भवती महिलाओं को इसे नही खिलाना चाहिए।

चिया, सब्जा और तुलसी (Basil) बीज में क्या अंतर है? 

चिया सीड्स (chia seeds) –

चिया सीड्स के सेवन से शरीर में ट्राईग्लेसराइड लेवल कम हो जाता है जो आपके दिल के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा चिया बीज में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और ओमेगा-3 फेटी एसिड होता है जोकि शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। चिया सीड्स के नियमित रूप से इनका सेवन करने से आपके शरीर का ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल दोनों नियंत्रित रहते हैं। ओर इसके सेवन से कैंसर जेसी घातक बीमारी को हराया जा सकता है।

सब्ज़ा बीज (Sabza Seeds)-

सब्जा बीज शरीर की धमनियों को साफ कर देती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके अलावा सब्जा बीज के सेवन से पाचन तंत्र अच्छा रहता है, ओर शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। सब्जा या तकमरिया तुलसी प्रजाति के पौधे से मिलने वाले बीज हैं । इन्हे तुकमलंगा Tukmalanga के नाम से भी जाना जाता है।

चिया सीड्स का पौधा केसा होता है?

चिया सीड्स को Mexican Chia तथा सल्बा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह मैक्सिको में पाया जाता है, चिया सीड्स का पौधा लेमियेसी यानि पौदीना परिवार का पौधा है, जोकि एक वर्षीय पौधा होता है। इस पौधे में खाद्य के रूप मेंचिया का उपयोग किया जाता था, आज कल चिया सीड्स की खेती मेक्सिको के अलावा बोलविया, अर्जेंटीना, ओर इकुआडोर में भी होती है।

Chia Seeds का पौधा 70-100 सेंटीमीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है। ओर इस पौधे के फूल सफेद व बैंगनी रंग के होते हैं।

इसके बीज छोटे (0.8-1.0 मिमी मोटे) काले, भूरे व सफ़ेद रंग के होते है।

चिया सीड्स की कीमत – Chia Seeds Price

Chia seeds के खाने के वैसे तो कई फायदे है, बात करते है चिया सीड्स की कीमत के बारे में, इसकी कीमत आपको कई जगहों पर अलग अलग देखने को मिलेगी लेकिन यहां आपको मार्केट में 800 रुपए से 1000 रुपए प्रति किलो में उपलब्ध है। आप इन्हे ऑनलाइन भी खरीद सकते है।

क्या चिया सीड्स का प्रयोग करना चाहिए या नहीं? 

चिया बीज के सेवन से कई लाभ होते हैं लेकिन इसके सेवन से कई साइड इफेक्ट भी होते हैं, एक दूसरे के कहने पर या कहीं पढ़ने के बाद चिया सीड्स को लोग अपनी डाइट में शामिल कर लेते हैं, परंतु पहले जरूरी यहां है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें कि आप चिया सीड्स का प्रयोग करे या न करे और अगर करें तो किस मात्रा में और किस समय करें।

FAQs

चिया सीड्स के बीज किस कलर के होते है?

चिया सीड्स के बीज काले व सफेद रंग के होते है।

चिया सीड्स का वैज्ञानिक नाम क्या है?

चिया सीड्स का वैज्ञानिक नाम साल्विया हिस्पैनिका है।

चिया सीड्स का हिंदी नाम क्या है?

इसे अक्सर लोग चिया बीज के नाम से बुलाते है, इसका कोई हिंदी नाम नही है।

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Women Empowerment Essay In Hindi – महिला सशक्तिकरण पर निबंध

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Women Empowerment Essay In Hindi – महिला सशक्तिकरण पर निबंध

हमारे देश में महिलाएं देश की जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा है। इसलिए राष्ट्र निर्माण के कार्य में महिलाओं का योगदान सर्वाधिक रहा है।

महिला सशक्तिकरण क्या है? What is women empowerment?

अक्सर प्रश्न उठता है कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ क्या है? इस प्रश्न की परख इस बात से की जानी चाहिए कि क्या नारी भयमुक्त होकर सम्मान खोए बिना, जिस लक्ष्य को पाना चाहती है, उसके लिए प्रयास कर सकती है या नहीं। यही सबलता और सुयोग्यता महिला सशक्ति की असल पहचान है। महिला सशक्तिकरण आंदोलन बीसवीं शताब्दी के आखिरी दशक का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक विकास कहा जा सकता है।

महिलाओं का विकास – Development Of Women

Women Empowerment Essay In Hindi

स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं का विकास हमारी आयोजना का केंद्रीय विषय रहा है, परंतु पिछले 20 वर्षों में कई नीतिगत बदलाव आए हैं। 1970 के एक दशक में जहां महिलाओं के ‘कल्याण’ की अवधारणा अपनाई गई वहीं 1980 के दशक में महिलाओं के विकास पर जोर दिया गया। 1990 के दशक में महिला अधिकारिता यानी सशक्तिकरण पर जोर देने के साथ ही यहां प्रयास भी किया गया कि महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हो और नीति निर्माण के स्तर पर भी उनकी सहभागिता रहे।
महिला सशक्तिकरण का अर्थ ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें महिलाओं कि अपने आपको संगठित करने की क्षमता बड़े।

महिला सशक्तिकरण का अर्थ क्या है? What is the meaning of women empowerment?

महिला सशक्तिकरण का अर्थ यह भी है कि महिलाएं सामाजिक आंदोलन में भाग ले सकें और उनका नेतृत्व कर सके तथा अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाओं को हटा सके। महिलाओं की उन्नति, विकास और शक्ति इस आंदोलन का प्रमुख लक्ष्य है। महिला सशक्तिकरण आंदोलन को सफल बनाने के लिए सरकार ने अनेक संवैधानिक सुरक्षाओं के साथ-साथ नई नीतियों को भी अपनाया है।

महिला विकास विभाग – Women Development Department

1985 में मानव संसाधन और विकास मंत्रालय के बीच गठित ‘महिला और बाल विकास विभाग’ का उल्लेख प्रमुख है। यहां विभाग नोडल संगठन के रूप में अपनी भूमिका के अंतर्गत योजनाएं, नीतियां और कार्यक्रम तैयार करता है। यहां कानून बनाने और इसमें संशोधन करने के साथ-साथ देश में महिलाओं और बच्चों की स्थिति में सुधार के लिए कार्य कर रहे सरकारी व गैर सरकारी संगठनों के प्रयासों में सुधार करता है। इसी क्रम में 1990 में राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम के अनुपालन में 31 जनवरी 1992 को राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया था।

महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य – Women Empowerment Goal

महिला सशक्तिकरण नीति का लक्ष्य महिलाओं की उन्नति, विकास तथा शक्ति संपन्नता है। राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति को केंद्र सरकार ने 21 मार्च 2001 को मंजूरी प्रदान की थी। तथा इसके महत्वपूर्ण बिंदु निम्न है?1. महिलाओं के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है कि वे यहां महसूस कर सके कि वह आर्थिक व सामाजिक नीतियां बनाने में शामिल हो।2. मानव अधिकारों का उपयोग करना और पुरुषों के साथ सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, और नागरिक आदि क्षेत्रों में आधारभूत स्वतंत्रता की समान रूप से भागीदारी सुनिश्चित करना।3. महिलाओं को देश के सामाजिक, राजनीतिक, एवं आर्थिक जीवन में बराबर की भागीदारी बनाना।4. महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य, रोजगार, एवं सामाजिक सुरक्षा में सहभागिता सुनिश्चित करना।5. महिलाओं के प्रति किसी भी तरह के भेदभाव को दूर करने के लिए कानून प्रणाली एवं सामुदायिक प्रक्रिया विकसित करना।6. समाज मैं महिलाओं के प्रति व्यवहार में बदलाव लाने के लिए महिलाओं और पुरुषों को समाज में बराबर भागीदारी निभाने को बढ़ावा देना।7. महिला और बालिका अपराध के किसी भी रूप में व्याप्त असमानता को दूर रखना

निष्कर्षत:

महिलाओं के अधिकारों को मानवाधिकारी के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी गई है, अतः आने वाले समय में महिला सशक्तिकरण आंदोलन और भी गति प्राप्त करेगा, परंतु इस संदर्भ में सतर्क करने की आजीवन सम्मत एवं पुरुष के सामाजिक परंपरा को देखते हुए यहां कहा जा सकता है कि सशक्तिकरण आंदोलन का सुदृढ़ हो ना यहां सुनिश्चित है जो कि राष्ट्रीय जीवन में भावी निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान होगा।भारत के सविधान में 73 वा और 74वां संशोधन 1993 महिलाओं की समान पहुंच सुनिश्चित करने और राजनीतिक शक्ति संरचना में अधिक भागीदारी प्रदान करने की दिशा में एक उपलब्धि है। राष्ट्रीय महिला शक्ति संपन्नता नीति को बुनियादी स्तर पर निष्पाद कार्य करने में पंचायती राज संस्थाओं, तथा स्थानीय स्वशासन का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अतिरिक्त शिक्षा प्रशिक्षण और अनुशासन में संबंधित संगठन, गैर सरकारी संगठनों के साथ-साथ महिला शक्ति संपन्नता के लिए अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रीय ग्राम प्रधान का विचार है औद्योगिक मिनिमम संस्थाएं तथा संगठनों के साथ नेटवर्किंग के जरिए तथा द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय भागीदारी का भी सहारा लिया जा सकता है।FAQ-महिला सशक्तिकरण आंदोलन से जुड़े सवाल?
Questions related to women empowerment movement?प्रशन: राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन कब किया गया था?
उत्तर: राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन 31 जनवरी 1992 को किया गया था।प्रशन: राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति को कब व किसने मंजूरी दी थी?
उत्तर: राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति को केंद्र सरकार ने 21 मार्च 2001 को मंजूरी प्रदान की थी।प्रशन: मानव संसाधन और विकास मंत्रालय के बीच किस वर्ष महिला और बाल विकास विभाग का उल्लेख किया गया था?
उत्तर: मानव संसाधन और विकास मंत्रालय के बीच 1985 में महिला और बाल विकास विभाग का उल्लेख किया गया था।प्रशन: महिला सशक्तिकरण का अर्थ क्या है?
उत्तर: महिला सशक्तिकरण का अर्थ है कि महिलाएं सामाजिक आंदोलन में भाग ले सकें, व अपना नेतृत्व खुद कर सके, ओर अपने मार्ग में आने वाली कठिनाइयों से खुद लड़ सके।और पढ़ें-

Women Empowerment Essay In Hindi

बाल विकास में खेल का महत्व

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बाल विकास में खेल का महत्व

खेल मानव जीवन व बाल जीवन के विकास का मूलभूत आधार रहा है, छात्र जीवन में खेल का महत्व कई दृष्टिकोण से उत्तम माना गया है, खेल से छात्र जीवन में अनुशासन, भावनात्मक विकास, ईमानदारी, मित्रता, ओर प्रतिस्पर्दा जैसे गुणों में वृद्धि होती हैं।

बच्चों के विकास में खेल का महत्व – Importance Of Games Essay In Hindi

छात्र जीवन में खेल का अत्यधिक महत्व है, खेल खेलने से विद्यार्थी में शारिरिक और मानसिक विकास बढ़ता है, इसी कारण आज हर स्कूल, कॉलेजों में पढ़ाई के साथ-साथ खेल के प्रति काफी जोर दिया गया है।

वास्तव में आज कल खेल कूद के बिना स्कूली शिक्षा अधूरी है, शायद इसी कारण आज प्रत्येक स्कूल खेल प्रतिस्पर्दा में भाग ले रहा है।

छात्र विभिन्न प्रकार के खेल, खेल सकते है, जेसे घर में खेले जाने वाले खेल (जिन्हें हम इंडोर खेल भी कहते है) जेसे- कैरम, शतरंज, वीडियो गेम, लूडो आदि इन खेलों में केवल मानसिक विकास होता है लेकिन शारीरिक विकास नहीं, शारीरिक विकास के लिए छात्रों को मैदान में उतरना पड़ेगा मैदान में कई ऐसे खेल खेले जाते हैं जिनसे छात्रों का शारीरिक व मानसिक दोनों विकास होते है।

जेसे कुछ खेल बड़े मैदानों में खेले जाते है जेसे क्रिकेट, हॉकी, ओर फुटबॉल, आदि और कुछ खेल छोटे मैदानों में खेले जाते है जेसे खो-खो, बास्केट बॉल, बेडमिटन, कबड्डी आदि इन खेलों में बच्चो का मानसिक व शारीरिक दोनो विकास होते है, छात्रों को आउटडोर खेल के साथ साथ इंडोर खेले भी खेलना चाहिए।

मैदान में खेले जाने वाले सभी खेल हमारे भीतर नया उत्साह एवं उमंग भर देते हैं, ओर इससे हमारे शरीर का रक्त चाप बढ़ता है, तथा इससे हमारी शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है, कई टीम आधारित खेल से बच्चों में मित्रता, समूह भावना, ओर अनुशासन का विकास होता है। समूह खेल से न केवल टीम भावना बढ़ती है अपितु इससे आपसी प्रेम, ओर भाईचारा भी बड़ता है। खेल के माध्यम से हम अलग अलग राज्यो, एवं अलग-अलग शहरों तथा अलग-अलग देशों के व्यक्तियों से जान पहचान बना सकते हैं। तथा इनसे हमें नई पहचान मिलती है, और नई नई बातों की जानकारी प्राप्त होती है।

खेलकूद के बिना हमारे जीवन में कोई रंग नहीं रहता है, तथा जीवन में गतिशीलता का अभाव रहता है, और इससे कई बीमारियां उत्पन्न होती है, तथा इससे व्यक्ति की प्रतिभा का विकास नहीं हो पाता है। जो विद्यार्थी खेल के प्रति जागरूक नहीं होता है उसे आगे चलकर वीरता, साहस, धैर्य, सहयोग, और अनुशासन से जीवन में अपरिचित रह जाता हैं।

खेल के विभिन्न नियम के पालन के माध्यम से हमें शुरुआत से ही अनुशासन की शिक्षा मिलती रहनी चाहिए, खेलकूद एक ऐसा क्षेत्र बनता जा रहा है जहां न केवल धन व यश है अपितु खिलाड़ी अपने समाज व अपने देश का नाम रोशन करता है।

जैसे – सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, नीरज चोपड़ा, मेजर ध्यानचंद्र, पीवी सिंधु, सानिया मिर्जा आदि जिसे भारतीय खिलाड़ियों ने न केवल अपना नाम अपितु पूरे देश का नाम पूरी दुनिया भर में ऊंचा किया है।

छात्र जीवन में खेल अत्यंत आवश्यक है, हमें छात्र जीवन में ही खेल के महत्व को समझ जाना चाहिए, खेल हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है, खेल हमारे विकास का मूलभूत आधार होता है। खेलकूद हमारे शारीरिक व मानसिक विकास का मजबूत आधार स्तंभ है।

तो यह था बच्चों के विकास में खेल का महत्व पर निबंध आशा करते है, यह आपको पसंद आया होगा।

कोरोना एक वैश्विक महामारी पर निबंध-Corona Par Nibandh

विश्वभर में फैला हुआ कोरोना वायरस ( कोविड 19 ) एक संक्रमित बीमारी है। Corona Virus का संक्रमण सबसे पहले दिसम्बर 2019 में चीन के वुहान शहर में हुआ था। क्योंकि ये एक संक्रमित बीमारी है इस कारण यह एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जल्द फैल जाती है।

Corona Ek Vaishvik Mahamari Par Nibandh In Hindi

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने कोरोना वायरस को एक महामारी बताया है।

इस कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण सर्दी, जुखाम, बुखार, गले में खराश और सांस लेने तकलीफ होती है, यह वायरस अलग-अलग तरीके से प्रभाव डालता है, यह वायरस रोगप्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है और हृदय पर घात करता है। इस बीमारी के चलते लोगो ने कई अपनो को खोया है, न जाने पूरी दुनिया भर से इस महामारी ने कितनी जाने ली है। और कितनो के घर उजाड़ दिए है। आज एक सामान्य व्यक्ति खुल कर सांस नहीं ले सकता है न ही कही घूम सकता है, इस महामरी ने अपनो को अपनो से जुदा कर दिया है।

इस कोरोना ने न जाने कितने देशों को कमर तोड़ दी है। जहां पहले व्यक्ति सामान्य रूप से एक देश से दूसरे देश में घूम सकते थे आज वही लोग अपने ही घरों में कैद है। किसी का रोजगार छीन लिया, तो किसी का घर छीन लिया, कई सारे लोग ने इस बंद हुए देश में अपना पालन पोषण कैसे किया है वे सिर्फ वे ही जानते है, केसे लोग बुखे सोए होंगे ये बात सोचकर भी डर लगता है।

अगर आज हमे इस लड़ाई को जितना है तो हमे इस महामारी को अपनी दुनिया से भागना होगा, हमे सबसे पहले अपनी ओर अपने आसपास के लोगो की सुरक्षा करनी चाहिए, हमे बिना जरूरी काम के घर से बाहर नहीं जाना चाहिए, अगर कुछ जरूरी काम हो तो ही घर से मास्क लगाकर निकालना चाहिए, भीड़ भाड़ वाले इलाकों से बचना चाहिए, सार्वजनिक स्थान पर दो गज की दूरी बनाए रखना चाहिए। थोड़ी-थोड़ी देर में सेनेटाइजर से अपने हाथ धोने चाहिए, और जरूरी अपना नंबर आने पर अपने आस-पास के वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर वेक्सिन ले और अपने परिजनों को वेक्सिन लेने की सलाह दे।

कोरोना संक्रमण के कारण पूरा विश्व मानो थम सा गया है, लेकिन आज हमारे कोरोना के योद्धाओं हमारे वैज्ञानिकों ने इस महामारी का हल निकाल लिया है, इस महामारी की वैक्सीन आज हर देश में उपलब्ध है, करोड़ों लोगों ने इस वेक्सिन को लगवाया है, हमारे देश में भी अब तक करोड़ों लोगों को वेक्सिन लग चुकी है और लगभग कई सारी जगह खुल चुकी है। आज लगभग कई समय बाद एक देश से दूसरे देश में जाना भी संभव हो गया है। इन सब का श्रेय हमारे डॉक्टरों, दुनिया भर के वैज्ञानिको और पुलिस, स्वास्थ्यकर्मी, व सभी कोरोना योद्धाओं को जाता है।

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इस लड़ाई में हमारी सरकार ने स्वयं को जोखिम में डालकर दिनरात मानवता की रक्षा की है। सभी डॉक्टरों व नर्स व अस्पताल में मौजूद सभी कर्मचारियो ने अपनी जान की रक्षा किये बिना लोगो की सेवा की है, हमे हमेशा इनका सम्मान करना चाहिए।

ये था कोरोना एक वैश्विक महामारी पर निबंध(Corona Ek Vaishvik Mahamari Par Nibandh) आशा करते है, यह आपको पसंद आया होगा।

क्रिकेट पर निबंध

Best Cricket Essay In Hindi

जीवन में खेल कूद का महत्व अत्यंत आवश्यक होता है, किसी भी इंसान के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए शिक्षा व भोजन के अलावा खेलकूद भी अति आवश्यक है। खेल मनोरंजन के लिए खेले जाते हैं परंतु खेल खेलने से बच्चों में अनुशासन बढ़ता है। वर्तमान में हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, क्रिकेट जैसे खेलों की प्रतियोगिता होती रहती है। और आप सभी को जानकारी खुशी होगी की क्रिकेट मेरा प्रिय खेल है, क्रिकेट खेलना व देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

क्रिकेट पर छोटे तथा बड़े निबंध ( Long and Small Essay On Cricket In Hindi 500 – 300 Words )

हमारे स्कूल में क्रिकेट (शब्द 500)

प्रस्तावना

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे स्कूल में कई प्रतियोगिता आयोजित की गई है जिसमें से एक क्रिकेट प्रतियोगिता भी शामिल है, आज मेरे स्कूल की क्रिकेट टीम का सामना ए. पी.जे. विद्यालय की क्रिकेट टीम से हुआ। क्रिकेट का आयोजन हमारे स्कूल के मैदान में हुआ, हमारी टीम के मुकाबले उनकी टीम ज्यादा मजबूत नजर आ रही थी, दोनों टीमों का मुकाबला अत्यंत रोमांच से भरा रहा, जो मुझे हमेशा याद रहेगा।

मैच प्रारंभ:

मैच 20-20 ओवरों का था। खेल सुबह 9:00 बजे प्रारंभ होना था, दोनों स्कूलों के विद्यार्थी व आसपास के लोग वहां मैच देखने के लिए आए थे, मैदान के चारों ओर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। अब मैच शुरू होने वाला था, दोनों टीमों के कप्तान आए। जिसके बाद सिक्का उछाला गया। टॉस का निर्णय विपक्षी के पक्ष में आया और उन्होंने पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया।

ए. पी.जे. विद्यालय के खिलाड़ी मैदान में उतरे, ओर हमारी टीम गेंदबाजी के लिए तैयार थी। हमारी टीम की ओर से पहला ओवर शार्दुल ने किया और खाफी अच्छा ओवर किया। 10 ओवर के बाद उनका स्कोर 65/2 रन के आसपास था और उस समय उनके दो खिलाड़ी आउट हो गए थे। हमारी टीम की शानदार गेंदबाजी के चलते सामने वाली टीम 20 ओवरों में केवल 130 का ही लक्ष्य दे पाई। जिसके बाद करीब 15 मिनिट का रेस्ट लिया गया। रेस्ट पूरा होने के बाद हमारी टीम के दो बल्लेबाज बेटिंग के लिए उतरे ओर एक शानदार शुरुवात हुई। हमारी टीम के केवल 8 ओवरों में 60 रन बना दिए थे बिना कोई विकेट गवाए।

जिसके बाद मैच में कुछ ऐसा हुआ 14 ओवर तक हमारे 5 विकेट गिर गए थे और हमारे रन केवल 80 थे। अब हमारी टीम को जीतने के लिए 30 गेंदों में 50 रनों को आवश्यकता थी, मैदान में, हमारी टीम के कैप्टन शुभम क्रिस पर थे शुभम 20 गेंदों पर 35 रन बना चुके थे। जिसके बाद शुभम और मेरी एक अच्छी साझेदारी हुई और शुभम की कप्तानी पारी के चलते हमने उस मैच को 5 विकेट से जीता था।

निष्कर्ष

मैच खत्म होने के बाद वहां पधारे मुख्य अतिथि ने हमारी टीम के कप्तान शुभम को ‘मैन ऑफ द मैच’ घोषित किया, और उनके हाथों में ट्रॉफी दी गई। वहां आए सभी दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। आज भी मुझे उन तालियों की गूंज सुनाई देती है। मैं जब भी उस मैच के बारे में याद करता हूं मुझे एक एक पल याद आ जाता है। वहां मैच में शायद कभी नहीं भूलूंगा।

क्रिकेट पर निबंध (शब्द 350+)

प्रस्तावना:

क्रिकेट जिसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जाता है, जो की एक आउटडोर खेल है, जिसमे दो टीम एक दूसरे के खिलाफ खेलती है, वैसे तो क्रिकेट को पूरे विश्व में पसंद किया जाता है किन्तु भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है, यहां के हर गांव, हर गली, हर मोहल्ले में आपको बच्चे, बूढ़े, युवा, सभी आपको क्रिकेट खेलते हुए नजर आएंगे। आज हमारे बीच में से निकले कई खिलाड़ी हमारे देश का नाम रोशन कर रहे है, ओर भारतीय क्रिकेट टीम को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे है।

क्रिकेट के नियम

क्रिकेट एक आउटडोर खेल है, जिसे स्टेडियम में आयोजित किया जाता है, जहां हर टीम के 11-11 खिलाड़ी भाग लेते है, जिसमे से हर टीम का एक कप्तान होता है, और एक सहकप्तान, मैच का निर्णायक अंपायर होता है, जो खेल के मैदान में निर्णय लेता है, मैच तीन रूपों में, टेस्ट, वन डे ओर T20, के फॉर्मेट में खेला जाता है, इसमें दोनो टीमें बारी बारी बल्लेबाजी व गेंदबाजी करती है, मैच की शुरुआत में टॉस होता है, जिसमे सिक्का उछाला जाता है, जिस कप्तान के पक्ष में निर्णय आता है, वह यह निर्धारित करता है, कि उसकी टीम को पहले बल्लेबाजी करनी है या गेंदबाजी करनी है, अगर वहां टीम पहले बल्लेबाजी करती है तो उसे ज्यादा से ज्यादा रन बनाने होंगे, ताकि दूसरी टीम उन रनों को चेस न कर सके। ओर अगर कप्तान गेंदबाजी का फैसला लेता है तो उस टीम को सामने वाली टीम के बल्लेबाजों को जल्द से जल्द आउट करना होगा और उन्हें ज्यादा रन बनाने से रोकना पड़ेगा। मैच के अंत में जो भी टीम विजय होती है उस टीम को कई पुरुस्कार दिए जाते है।

निष्कर्ष

खेल हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है, खेल से हमारे स्वास्थ में भी कई सुधार होते है, खेल से हमारा मन शांत रहता है, हम अगर दिन में एक बार भी क्रिकेट या अन्य हमारे पसंदीदा खेल हमारे दोस्तो या आसपास के लोगो के साथ खेलते है तो हमारा पूरा दिन ऊर्जामय जाता है, और हमे एक सकारात्मकता मिलती है। क्रिकेट के दौरान कई गतिविधियां होती है जिससे स्वास्थ अच्छा रहता है।

मेरा प्रिय खेल क्रिकेट पर निबंध (300+ शब्द)

प्रस्तावना

मेरा प्रिय खेल क्रिकेट है, क्रिकेट खेलना मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है, में और मेरे दोस्त रोजाना स्कूल से घर आने के बाद गार्डन में घंटो क्रिकेट खेलते थे, गर्मी की छुट्टियों में तो हमारा खेलना और भी ज्यादा हो जाता था, न खाने की फिकर होती थी, न घर जाने की फिकर होती थी, क्रिकेट खेल ही ऐसा है की यहां सबको पसंद आता है। क्रिकेट, जिसकी शुरुआत ब्रिटेन में हुई थी, आज क्रिकेट को भारत, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, बांग्लादेश, न्यूजरलेंड, पाकिस्तान आदि देशों में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।

क्रिकेट के नियम

मेरा प्रिय खेल क्रिकेट खेलना मुझे बहुत पसंद है, क्रिकेट का नाम सुनते ही मन मे एक उत्साह जाग उठता है, स्कूल मे भी बाकी विषयों के मुकाबले खेल का पीरियड मुझे व मेरे अलावा सभी छात्रों को काफी पसंद आता है, क्रिकेट यह एक प्रकार का आऊटडोर खेल है। जो बाहर मैदान में खेला जाता है। जिसे अंतराष्ट्रिय स्तर व राष्ट्रीय स्तर पर खेला जाता है, मुझे क्रिकेट खेलने के साथ साथ क्रिकेट देखना भी पसंद है। चाहे बच्चे हो, बुढ़े हो या नौजवान हो, सबको ही क्रिकेट खेल काफी पसंद होता है।

इस खेल मे निर्णय देने के लिए अंपायर होते है। इसमें एक टीम के खिलाडी बल्लेबाजी करते है और दूसरी टीम के खिलाडी गेंदबाजी करते है । क्रिकेट में हार व जीत का फैसला बनाए गये रनों के आधार पर होता है, अंतराष्ट्रिय स्तर पर क्रिकेट को तीन स्वरूपों के आधार पर खेला जाता है। पहला टेस्ट मैच, दूसरा एकदिवसीय मैच ( वन डे मेंच ), ओर तिसरा T – 20 मेंच, जो बाकी दो मेंचो के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय है। भारत में आयोजित आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) को पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है।

निष्कर्ष

क्रिकेट खेलने के दौरान मेरे कई नए दोस्त बने जिनसे आज तक मेरी दोस्ती है, वो दिन मुझे जिंदगी भर याद रहेंगे और वो दोस्त भी जिनसे में मिला, जिनके साथ मेने समय बिताया, जिनके साथ मेने घंटो तक क्रिकेट खेला, क्रिकेट के दौरान मेरे ऐसे कई पल है जिन्हे में जिंदगी भर याद रखूंगा।

तो ये थे क्रिकेट पर छोटे तथा बड़े निबंध( long and Small Essay On Cricket In Hindi )।

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पराग अग्रवाल का जीवन परिचय – New Twitter Ceo Parag Agrawal Biography In Hindi

पराग अग्रवाल का जीवन परिचय, बायोग्राफी, ट्विटर के नये सीईओ, उम्र, जन्म, पत्नी, बच्चे परिवार, नेटवर्थ, सैलरी (Parag Agrawal Biography in Hindi) (Twitter New CEO, Age, Birth, Net Worth, Salary, Education, Wife, children Family)

आपने कभी न कभी तो Twitter का नाम सुना होगा, या उसे यूज भी किया होगा, Twitter एक सोशल मीडिया हैंडल है, जहां लोग अपने विचारों को ट्वीट करते हैं या कुछ जानकारी को शेयर करते हैं, ट्विटर एप को अब तक 1 बिलियन से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके है, ओर ये एक अमेरिकी कम्पनी है। इसका हेडक्वार्टर सैन फ्रांसिस्को, कैलीफोर्निया में स्थित है।

दोस्तो अभी हाल ही में Twitter के पूर्व सीईओ जैक डॉर्सी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है उसके चलते अब ट्विटर ने Parag Agarwal को नए सीईओ के लिए चुना है, ये पिछले लगभग 10 सालो से कंपनी के साथ जुड़े थे, लेकिन क्या आपको पता है पराग अग्रवाल कौन है? आज हम आपको बताने जा रहे हैं, पराग अग्रवाल की सफलता की कहानी के बारे में।

पराग अग्रवाल कौन है (Who is Parag Agrawal)

Parag Agrawal Biography In Hindi

पराग अग्रवाल जोकि अब ट्विटर के नए सीईओ है, जैक डॉर्सी ट्विटर के पूर्व सीईओ ने अभी हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, अब ट्विटर ने 29 नवंबर 2021 को पराग अग्रवाल को नया सीईओ नियुक्त किया है।

पराग अग्रवाल का जन्म एवं आयु (Parag Agrawal Birth and Age)

पराग अग्रवाल का जन्म 21 मई 1984 को अजमेर, राजस्थान में हुआ था, इनकी उम्र लगभग 37 वर्ष (2021) है, ओर ये अब खारघर, मुंबई में रहते है।

पराग अग्रवाल के माता, पिता और पत्नी एवं परिवार (Parag Agrawal Father, Mother, Wife and Family)

पराग अग्रवाल के माता पिता को कोई जानकारी पराग द्वारा नहीं दी गई है, पराग की पत्नी का नाम विनीता अग्रवाल है, जोकि एंड्रीसेन होरोविट्ज़ में काम करती है. इनके पिता परमाणु ऊर्जा विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी थे और इनकी मां एक स्कूल टीचर थी,

पराग अग्रवाल और विनीता शादी

पराग ने विनीता के साथ अक्टूबर 2015 में सगाई की थी और जनवरी 2016 में आपस में शादी कर ली थी, इनका एक बेटा भी जिसका नाम अंश है, पराग अब अपनी पत्नी और बच्चे के साथ कैलिफॉर्निया के सैन फ्रांसिस्को में रहते हैं।

पराग अग्रवाल की शिक्षा (Parag Agrawal Education)

पराग अग्रवाल का जन्म अजमेर, राजस्थान में हुआ था, जिसके बाद वे खारघर, मुंबई में शिफ्ट हो गए थे, पराग ने एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल से अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी. बता दे की पराग बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल के क्लासमेट थे, पराग ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए आईआईटी मुंबई में एडमिशन लिया. ओर वहां से उन्होंने 2005 में कंप्यूटर साइंस विषय से बीटेक की डिग्री हासिल की, ओर स्टैंफोर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी।

पराग अग्रवाल ने 2001 में हुए तुर्की में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीता था, ओर 2000 सन् में ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम में 77वीं रैंक हासिल की थी,

पराग अग्रवाल की सफलता (Parag Agrawal Career)

2011 में ट्विटर से जुड़े थे पराग-

पराग अग्रवाल ने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग करने के बाद अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की डिग्री हासिल की थी, पराग अग्रवाल 2011 में ट्विटर के साथ जुड़े थे, इससे पहले वह याहू और माइक्रोसॉफ्ट जेसी बड़ी कंपनीयो में काम कर चुके है, पराग कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कंपनी में शामिल हुए थे,

अक्टूबर 2017 में एडम मासिंगर ने अपने सीटीओ का पद छोड़ने के बाद, पराग अग्रवाल को ट्विटर का नया सीटीओ नियुक्त किया गया था, ओर अब 29 नवंबर 2021 को पराग अग्रवाल को ट्विटर का नया सीईओ बनाया गया है।

पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीईओ की सेलरी (Parag Agarwal salary)

पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीईओ बन गए है, इनकी सालाना सैलरी 1 मिलियन डॉलर है, यानी पराग को करीब सात करोड़ रुपये सालाना का पैकेज मिलेगा, इसके अलावा उन्हें बोनस के साथ प्रतिबंधित शेयर यूनिट समेत 12.5 मिलियन डॉलर मूल्य के प्रदर्शन-आधारित स्टॉक यूनिट भी दिए जाएंगे।

पराग अग्रवाल नेटवर्थ (Parag Agrawal Net Worth)

पराग अग्रवाल की नेटवर्थ एक रिपोर्ट के अनुसार 1.5 मिलियन डॉलर के करीब बताई गई है जोकि भारतीय रूपयो में लगभग 9 करोड़ रुपए होते है।

एलन मस्क की कहानी

FAQ-

प्रशन: पराग अग्रवाल कोन है?
उत्तर: पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीईओ है।

प्रशन: पराग अग्रवाल का जन्म कब और कहां हुआ था?
उत्तर: पराग अग्रवाल का जन्म 21 मई 1984 को अजमेर, राजस्थान में हुआ था,

प्रशन: पराग अग्रवाल की पत्नी का नाम क्या है?
उत्तर: पराग अग्रवाल की पत्नी का नाम विनीता अग्रवाल है।

प्रशन: पराग अग्रवाल को ट्विटर नया सीईओ कब बनाया गया है?
उत्तर: पराग अग्रवाल को ट्विटर नया सीईओ 29 नवंबर 2021 को बनाया गया था।

प्रशन: पराग अग्रवाल ट्विटर के सीटीओ कब बने थे?
उत्तर: पराग अग्रवाल ट्विटर के नए सीटीओ अक्टूबर 2017 में बने थे।

प्रशन: पराग अग्रवाल ट्विटर के साथ कब जुड़े थे?
उत्तर: पराग अग्रवाल ट्विटर के साथ 2011 में जुड़े थे।

प्रशन: पराग अग्रवाल ने इंजीनियरिंग कहां से की है?
उत्तर: पराग अग्रवाल ने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की है।

प्रशन: ट्विटर से पहले पराग अग्रवाल कोन सी कंपनी में काम कर चुके है?
उत्तर: ट्विटर से पहले पराग अग्रवाल याहू और माइक्रोसॉफ्ट जेसी बड़ी कंपनी में काम कर चुके है।

प्रशन: पराग अग्रवाल ने पीएचडी की डिग्री कहां से हासिल की है?
उत्तर: पराग अग्रवाल ने पीएचडी की डिग्री अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से हासिल की है।

प्रशन: पराग अग्रवाल ने किस क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की है?
उत्तर: पराग अग्रवाल ने कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की डिग्री हासिल की है।

प्रशन: पराग अग्रवाल ट्विटर से किस पद पर शामिल हुए थे?
उत्तर: पराग अग्रवाल ट्विटर से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कंपनी में शामिल हुए थे।

प्रशन: ट्विटर के पूर्व सीईओ कोन थे?
उत्तर: ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डॉर्सी थे।

प्रशन: पराग अग्रवाल की सेलरी कितनी है?
उत्तर: 7 करोड़ रूपए सालाना।

प्रशन: पराग अग्रवाल ने किस वर्ष विनीता से शादी की थी?
उत्तर: जनवरी 2016 में।

प्रशन: पराग अग्रवाल के बेटे का क्या नाम है।
उत्तर: अंश।

प्रशन: पराग अग्रवाल की नेटवर्थ कितनी है ?
उत्तर: पराग अग्रवाल की नेटवर्थ लगभग 1.5 मिलियन डॉलर है।

प्रशन: पराग अग्रवाल कहां रहते है?
उत्तर: पराग अग्रवाल कैलिफ़ोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में रहते है।

गांव में करने लायक 9 सबसे अच्छे बिजनेस – 2022 Village Business Ideas in Hindi

9 गांव में सबसे ज्यादा चलने वाला बिजनेस – Best Business For Village

भारत के ज्यादातर लोग आज भी गांवों में रहते हैं, देश की लगभग 70 फ़ीसदी आबादी आज भी गांव में बसती है, परंतु आज कल ज्यादातर लोग गांव व अपने परिवार जनों को छोड़कर शहर में जाकर बस रहे हैं, इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वे शहर जाकर पैसे कमा सके, क्योंकि गांव में पैसे कमाने का सबसे बड़ा सोर्स खेती-बाड़ी है, किंतु लोग खेती-बाड़ी ना कर कर नया काम(Business) शुरू करना चाहते हैं इसलिए वे शहर, क्षेत्रों की ओर चले जाते हैं, परंतु आज हम आपको बताने जा रहे गांव में करने लायक 9 सबसे अच्छे बिजनेस(Best Village Business) के बारे में जो आप अपने गांव में रहकर बड़ी आसानी से कर सकते हैं, ओर आप इससे अच्छी मोटी कमाई भी कर सकते हैं।

गाँव में चलने वाले 9 बेस्ट बिज़नेस

village business ideas in hindi

रिचार्ज शॉप/Recharge Shop

आजकल हर बच्चे, बूढ़े, व बड़ों के पास मोबाइल देखने को मिलते हैं चाहे वह गांव हो या शहर तो आप अपने गांव में रिचार्ज शॉप की दुकान खोल सकते हैं आप दुकान के बिना भी घर बैठे बैठे भी लोगो के फोन का रिचार्ज कर सकते हैं, किंतु आप अगर दुकान से रिचार्ज करते हैं तो आप रिचार्ज के साथ-साथ अन्य मोबाइल एसेसरीज, मोबाइल फोन भी बेच सकते है.

दूध डेयरी/Milk Shop

आप अपने गांव में दूध डेयरी भी खोल सकते है, इसके लिए आप अच्छी नस्ल की भैंस या गाय खरीद कर यह व्यवसाय शुरू कर सकते है, आप अपने घर के दूध के साथ-साथ गांव वालो का दूध भी खरीद कर सारे दूध को अपने प्रॉफिट के साथ नजदीकी शहर में जाकर बेच सकते है, ओर ये गांव में रहकर करने का सबसे बढ़िया बिजनेस है।

खाद व बीज की दुकान/Fertilizers And Seeds Store

आप अपने गांव में रहकर अपने गांव के किसानों के लिए हैं गांव में खाद व बीज की दुकान की दुकान खोल सकते है, किसान भाईयों को अक्सर खाद और बीज की आवश्यकता होती है, लेकिन खाद व बीज की दुकान गांव में न होने की वजह से इसके लिए उन्हें दूर अपना काम छोड़कर शहर जाना पड़ता है, इस समस्या से बचने के लिए आप अपने गांव में ही खाद व बीज की दुकान हो सकते हैं और अपने गांव वालों को अच्छी कीमत में खाद व बीच बेच सकते है।

ट्रांसपोर्ट सर्विस/Transport Service

गांव में लगभग हर व्यक्ति खेती-बाड़ी ही करता है, जिसमें से कुछ लोगो के पास ज्यादा जमीन होती है और कुछ के पास बहुत कम, जिनके पास ज्यादा जमीन होती है उनके पास कृषि यंत्र यानी ट्रैक्टर, ट्राली, बुवाई मशीन, आदि की सुविधा होती है, परंतु अधिकतर किसानों के पास यह सुविधा नहीं होती है, जिसके कारण उन्हें खेती करने व अपनी फसल बेचने के लिए शहर जाने में भी बड़ी दिक्कत होती है, आप उनकी इस समस्या को आसान कर सकते हैं, आप अपने ट्रैक्टर ट्राली को ट्रांसफर सर्विस यानी किराए पर देकर उनका काम आसान कर सकते हैं, आप ट्रैक्टर की मदद से उनके खेत की बुआई और अखाई कर सकते है ओर उनकी फसल को मंडी में जाकर बेच सकते हैं, इससे सर्विस से आप अच्छी खासी Income कर सकते हैं।

प्लांट नर्सरी/Plant Nursery

प्लांट नर्सरी का बिज़नस बेहद ही आसान और सरल है, और इस बिजनेस को आजकल हर व्यक्ति पसंद करता है, आज कल लोग अपने घर, आंगन, ओर बगीचे को हरा-भरा रखना चाहते हैं, और घर में प्लांट होने की वजह से घर का वातावरण भी शुद्ध रहता है, पेड़ पौधों की वजह से घर की सुंदरता और भी बढ़ जाती है, इस व्यवसाय को आप अपने घर पर रहकर बड़ी आसानी से कर सकते हैं, इस व्यवसाय में आप अपने घर व खेत पर बहुत ज्यादा मात्रा में भिन्न-भिन्न व तरह-तरह के पेड़ व पौधे उगा सकते है, आप शहरों में अपने प्लांट को बेच सकते है जिससे आपको अच्छी खासी Income हो सकती है।

वेल्डिंग एवं फेब्रिकेशन बिजनेस/Welding & Fabrication Business

आजकल लोग गांव में अपने पुराने घरों को छोड़कर नए घर बना रहे हैं, ओर सरकार भी उन्हें इसके लिए कई सुविधा प्रदान कर रही है, ओर आवास योजना के चलते सरकार हर किसी को घर बनाने के लिए पैसे दे रही है, जहां पहले घर बनाने के लिए मिट्टी का प्रयोग और खिड़की व गेट बनाने के लिए लकड़ी का प्रयोग होता था, वही आजकल घर बनाने के लिए सीमेंट, ईंट और सरिया का प्रयोग होता है, और खिड़की दरवाजों के लिए लोहे का प्रयोग होता है, जिसके लिए गांव के लोगों को दूर शहर जाकर इन सामनो को खरीदना पड़ता है, आप अपने गांव में वेल्डिंग एवं फेब्रिकेशन बिजनेस शुरु कर सकते है, ओर इन सामने को सस्ते दामों में गांव में बेच सकते है,

पोल्ट्री फार्म/Poultry Farm

आज कल अंडे एवं चिकन को तो हर कोई पसंद करता है, ओर इसकी मांग भी बहुत रहती है और इसकी मांग कभी कम भी नहीं होती है, आप अपने गांव में रहकर पोल्ट्री फार्म का बिजनेस भी बड़ी आसानी से शुरू कर सकते है, इसके लिए आपको थोड़ी ही जगह की जरूरत रहती है और आप इसी अच्छी मोटी कमाई कर सकते है।

ऑनलाइन शॉप/Online shop

आप अपने गांव में ऑनलाइन शॉप खोल सकते हैं, इसके लिए आपको केवल एक कंप्यूटर की आवश्यकता होती है, आप इसकी मदद से गांव वालों के सभी प्रकार के ऑनलाइन काम कर सकते हैं, गांव में रहने वाले बच्चों को कई बार किसी ऑनलाइन फॉर्म को भरने के लिए शहर जाना पड़ता है, और कई किसानों को ऑनलाइन पंजीयन करने के लिए भी शहर जाना पड़ता है, आप उनके इस कार्य को आसान कर सकते हैं, आप अपने गांव में ऑनलाइन की शॉप खोल सकते हैं, साथ ही उसमें मोबाइल रिचार्ज की सुविधा रख सकते हैं, ओर साथ ही फोटोकॉपी की भी मशीन रख सकते हैं। और इस बिजनेस से आप अच्छी कमाई कर सकते हैं।

आटा चक्की/Flour Mill

आप अपने गांव में आटा चक्की की भी सुविधा शुरू कर सकते हैं, अगर आपके गांव में कोई आटा चक्की नहीं है, या केवल एक ही चक्की है जो की किसी प्रकार की मिलावट कर रहा हो और गांव के लोगों को न चाहकर भी उसी से आटा पिसवाना पड़ता है, तो आप अपने गांव में रहकर इस व्यवसाय में कदम रख सकते हैं, यह गांव में चलने वाला बिजनेस में बेस्ट बिजनेस है।

तो यह थे गांव में करने लायक 9 सबसे अच्छे बिजनेस (Best Village Business Ideas) जिनकी मदद से आप अपने गांव में रहकर अच्छे पैसे कमा सकते हैं,।

अगर यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य Share करें ताकि वे भी इन बिजनेस Ideas से अपना करियर बना सकें।

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वैट (VAT) क्या है । वेट का फुल फॉर्म क्या है? । मूल्य संवर्धित कर-प्रणाली क्या है?

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VAT Kya Hai In Hindi

वैट (Value Added Tax) जो कि भारत के लिए एक नई कर-प्रणाली है, लेकिन यहां प्रणाली भारत से पहले विश्व के लगभग 140 देशों में यहां सफलतापूर्वक पहले से ही लागू है। इस प्रणाली को सबसे पहले 1954 में फ्रांस में लागू किया गया था, भारत में राजा जे. चल्लेया कमेटी की सिफारिशों के पश्चात केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise duty) एवं केंद्रीय बिक्री कर (Central sales tax) के स्थान पर मूल्य वैट (VAT) प्रणाली को अपनाने के प्रयास काफी लंबे समय से चले आ रहे थे। वर्तमान केंद्रीय सरकार ने इसे अप्रैल 2005 में लागू किया था।

Vat Kya Hai

भारत में जुलाई सन् 1991 से आर्थिक सुधार कार्यक्रम प्रारंभ किए गए थे तथा इनका क्रियान्वयन भी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में विश्व स्तरीय प्रतियोगिता विकसित करने और इसे परिवर्तित अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से किया गया था ताकि विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ भारत को विदेशी निवेश के लिए एक आदर्श क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सके। जबकि तब विश्व के 140 देश में वैट प्रणाली को अपनाया जा चुका था, फिर भी भारत जैसी उद्दीप्त होती हुई अर्थव्यवस्था में इसे लागू करने के पीछे अपेक्षित कई कारण थे?

वैट का इतिहास बताता है कि जिन भी देशों ने इसको लागू किया उन देशों में न केवल राजस्व संग्रहण में वृद्धि हुई बल्कि वस्तुओं की लागत में कमी के कारण उपभोक्ताओं को भी राहत मिली। हमारे पड़ोसी देश चीन को भी कभी बंद अर्थव्यवस्था का प्रतीक माना जाता था, परंतु 3 जनवरी 1994 को चीन की सरकार ने वेट लागू कर दिया था उसके पश्चात चीन की अर्थव्यवस्था ने तेजी के साथ प्रगति की है। भारत प्रगति कि वह रफ्तार नहीं पकड़ पाया जो कि चीनी अर्थव्यवस्था ने हासिल की है।

वैट का अर्थ – VAT Ka Matlab Kya Hai-

Vat Fullform In Hindi

वैट का हिंदी अर्थ है मूल्यवर्धित कर। यहां बिक्री कर व सरचार्ज आदि के स्थान पर लागू होने वाला कर है, जिसे किसी भी वस्तु के मूल्यवर्धन पर लगाया जाता है। जब भी कोई वस्तु बिक्री प्रणाली व उत्पादन प्रणाली के कई हाथों से निकलती है तो हर मुकाम पर उस वस्तु के बिक्री मूल्य पर यह कर लगाया जाता है। यदि किसी वस्तु के मूल्य में या किसी को पद्धति द्वारा या मुकाम पर उस वस्तु के गुणों में वृद्धि होती है तो प्रत्येक ऐसे अवसर पर कर लगता है। लेकिन जब इसकी अंतिम बिक्री होती है उस दशा में ही कर पूर्ण रूप से लगता है।

इस प्रकार इस कर प्रणाली में उत्पाद में पिछले मूल्यवर्धन के अवसर या मुकाम पर या बिक्री के अवसर पर दिया गया वैट बाद की बिक्री अवसर पर घटा दिया जाता है ताकि केवल मूल्यवर्धन पर ही कर लगे। इस प्रकार यहां अलग-अलग अवसर पर अलग-अलग मुकाम पर किस्तों में वसूल किया जाता है।

वैट के जिन प्रतिकूल प्रभाव की चर्चा जोर-शोर से रही है, उनमें निम्नलिखित प्रमुख है-

• वस्तुओं की कीमत बढ़ने की संभावना।
• वेट भी लग रहा है वह दूसरे कर भी लगेंगे।
• बिना कंप्यूटर के इस प्रणाली के तहत कार्य करना असंभव है।
• कानूनी रूप से अत्यंत जटिल है।
• शर्त के अनुसार कोई भी केंद्रीय कर नहीं हटाया गया है।
• भारत का वैट विदेशों में प्रचलित वैट से भिन्न है।
• गोदामों व वेयरहाउस को सील भी किया जा सकता है।

सैद्धांतिक तौर पर जिस वस्तु पर वैट लगाया जाएगा उसकी कीमत वर्तमान कीमत से कम होनी चाहिए क्योंकि हर मुकाम पर या पड़ाव पर पूरे वैट की दर से कर नहीं लगेगा बल्कि उस वस्तु पर जितना वैट पहले लग चुका है वह घटाया जाएगा। लेकिन यदि किसी वस्तु पर वैट नहीं लगता है और वह वैट के अन्तर्गत आती है तो वह अवश्य महंगी होगी। लेकिन ऐसा तभी होगा जब वह काले बाजार में बिना बिल के बिकती हो।

वैट लागू होने के बाद आदर्श स्थिति में ग्राहक को लाभ ही लाभ होगा और उस पर कर का बोझ कम होगा, लेकिन व्यापारियों की जो मुख्य आपत्तियां हैं, उसके बारे में केन्द्र सरकार को विचार कर पहल करनी चाहिए। केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह वैट का आकलन करने के लिए कम्प्यूटर के जरिये डाटाबेस बनाए जैसा कि ‘टिन’ अर्थात ‘इनकम टैक्स इनफॉर्मेशन नेटवर्क’ के लिए किया गया।

इस कर के बारे में जगह – जगह सेमिनार व सभाओं के जरिये व्यापारियों को इस पद्धति के बारे में बताया जाए। टेलीविजन पर कार्यक्रम दिखाकर व्यापारियों का विश्वास जीता जाए और उन्हें यह समझाया जाए कि वैट से किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और सभी को लाभ होगा।

भारत के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा वेट पर प्रस्तुत श्वेत पत्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं-

• 550 मदों को वैट की परिधि मैं लाने का प्रयास किया गया है।

• 550 मदों पर समस्त राज्यों में समान कर लगाने का प्रयास किया गया है।

• अधिकांश वस्तुओं पर 12.5% की दर से वेट लगेगा।

• 270 वस्तुओ पर 4% की दर से वैट लगाया जाएगा।

• किमती धातुओं पर 1% की दर से वेट लगाया जाएगा।

• औषधियों, कृषि और औद्योगिक से जुड़ी वस्तुओं पर 4% की दर से वैट लगाया जाएगा।

• राज्यों को चाय पर 12.5% या 4% वेट चुनने की छूट प्रदान की गई है।

• वेट लागू होने के बाद कर भार में कमी की प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होगी।

• ₹5 लाख तक वार्षिक व्यापारिक टर्नओवर वाले व्यापारियों को वैट की परिधि से पूर्णता मुक्त रखा गया है।

• ऐसे व्यापारियों, जिनका व्यापारिक लेन-देन 5 लाख रूपए से 50 लाख रुपए तक वार्षिक है, उन पर 1% की दर से वैट लगेगा।

• मदों – वस्त्र, चीनी और तंबाकू जो कि अतिरिक्त उत्पाद शुल्क संरचना के अंतर्गत आती है, उनको 1 वर्ष की अवधि के लिए वेट की परिधि से मुक्त रखा गया हे।

•10 वस्तुओं पर वैट आरोपित करने पर राज्य विशेष को पूर्ण छूट प्रदान की गई है।

FAQ About VAT-

वैट से जुड़े सवाल?
VAT related questions?

प्रश्न: वैट का फुल फॉर्म क्या है?
उत्तर: वैट का फुल फॉर्म वैल्यू ऐडेड टैक्स है।

प्रश्न: What is the full form of VAT?
उत्तर: The full form of VAT is Value Added Tax.

प्रश्न: वैट किस प्रकार की प्रणाली है?
उत्तर: वैट एक कर-प्रणाली है।

प्रश्न: वैट को सर्वप्रथम कहां और कब लागू किया गया था?
उत्तर: वैट को सर्वप्रथम 1956 में फ्रांस में लागू किया गया था।

प्रश्न: वैट प्रणाली को भारत में कब लागू किया गया था?
उत्तर: वैट प्रणाली को भारत में 2005 में अपनाया गया था।

प्रश्न: वैट का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर: वैट का हिंदी अर्थ मूल्यवर्धित कर है।

प्रश्न: चीन में वैट कब लागू हुआ था?
उत्तर: चीन में वैट 3 जनवरी 1994 को लागू हुआ था।

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देवउठनी एकादशी पर निबंध

देवउठनी (ग्यारस) एकादशी हिंदुओं का एक खास पर्व होता है, इस पर्व को प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की शुल्क पक्ष की एकादशी के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा के बाद देवउठनी एकादशी को जागते है, देवउठानी एकादशी के दिन परिवार के सभी सदस्य भगवान विष्णु को जगाने का आह्वान करें, इसी दिन से शादी-ब्याह और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

देवउठनी ग्यारस पर निबंध – Devuthani Ekadashi Essay In Hindi

Devuthani Ekadashi Essay In Hindi

भगवान विष्णु प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की एकादशी को सोते है, ओर पूरे 4 महीने के बाद देवउठनी ग्यारस के दिन उठते है, इस दिन के बाद से ही शुभ मुहूर्त शुरू होता है, इससे पहले बीते 4 महीने में कोई शुभ मुहूर्त नहीं होता है, देवउठनी ग्यारस के दिन से शादी-ब्याह की शुरुवात हो जाती है।

भगवान शालिग्राम और माता तुलसी विवाह

इस दिन तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाता है, जिसमे माता तुलसी विवाह में शामिल होने के लिए परिवार के सभी सदस्य और अतिथि नहा-धोकर नए कपड़े पहन कर विवाह में शामिल होते हैं।

जहां माता तुलसी का पौधा रखा होता है वहां की अच्छी तरह साफ सफाई की जाती है, तुलसी के पास गेरू से रंगोली बनाई जाती है, विवाह के आयोजन से पहले माता तुलसी का चुनरी, लाल बिंदी और चूड़ियां पहनाकर माता का श्रृंगार किया जाता है। माता तुलसी के पौधे के दाईं और चौकी पर भगवान शालीग्राम को बिठाया जाता है, भगवान शालीग्राम को दूध में भीगी हल्दी से नहलाया जाता है, ओर भगवान शालीग्राम को मोसमी फल चढ़ाएं जाते है।

भगवान शालीग्राम और माता तुलसी के विवाह के मंडप को खूब सजाया जाता हैं, ओर इसमें खासकर गन्ने का इस्तमाल किया जाता हैं।
विवाह के दौरान घर के पुरुष सदस्य भगवान शालिग्राम को चौकी समेत हाथ में लेकर तुलसी माता की सात परिक्रमा करते है, ओर साथ ही मंगलाष्टक जरूर बोलते है, विवाह संपन्न होने के बाद भोजन और प्रसाद का वितरण किया जाता है।

सत्यानारायण कथा

इस दिन लोग अपने घरों में भगवान सत्यानारायण की कथा करवाते है, ओर इसे सुनते है, भगवान सत्यानारायण की कथा करवाने से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है।

देवउठनी ग्यारस का पर्व हिन्दू धर्म के अनुसार बहुत अहम माना गया है, इस दिन हिंदू मंगलकार्यों का आरम्भ होता है, इस दिन लोग भगवान विष्णु की आराधना करते है। इस दिन लोग अपने घरों में सत्यनारायण की कथा करवाते है और उसे सुनते है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता तुलसी की भी पूजा करते हैं और भगवान शालिग्राम से इनका विवाह करवाते है। आज के दिन लोग भगवान विष्णु व माता तुलसी से सुख-शान्ति की कामना करते हैं।

देवउठनी (ग्यारस) एकादशी पर 10 लाइन

1. भगवान विष्णु प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की एकादशी के दिन सोते है, इसके बाद 4 माह तक कोई शुभ मुहूर्त नही होता है।

2. भगवान विष्णु कार्तिक मास की देवउठनी ग्यारस के दिन 4 माह के अंतराल के दौरान जागते है, ओर इस दिन से शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है।

3. देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाता है, जिसमें माँ तुलसी और भगवान शालिग्राम (विष्णु अवतार) का विवाह व उनकी पूजा की जाती है।

4. इस दिन लोग अपने घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा व पूजा का आयोजन करवाते है।

5. इन 4 माह को चातुर्मास भी कहा जाता है, इन 4 माह में हिंदू धर्म के अनुसार कोई शुभ काम नहीं किए जाते है।

6. माता तुलसी के पति भगवान शालिग्राम भगवान विष्णु के अवतार हैं।

7. ऐसा माना जाता है कि माता तुलसी विवाह के दिन पूजा करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं।

8. देवउठनी ग्यारस के दिन भर लोग भगवान विष्णु, माता तुलसी, भगवान शालिग्राम की पूजा करते हैं।

9. लोग इस दिन अपनी श्रद्धा से व्रत रखते हैं।

10. 2021 वर्ष में नवंबर महीने की 14 तारीख को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा।

देवउठनी ग्यारस का पर्व हिन्दू धर्म के अनुसार बहुत अहम माना गया है, इस दिन हिंदू मंगलकार्यों का आरम्भ होता है, इस दिन लोग भगवान विष्णु की आराधना करते है। इस दिन लोग अपने घरों में सत्यनारायण की कथा करवाते है और उसे सुनते है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता तुलसी की भी पूजा करते हैं और भगवान शालिग्राम से इनका विवाह करवाते है। आज के दिन लोग भगवान विष्णु व माता तुलसी से सुख-शान्ति की कामना करते हैं।

FAQ – Devuthani Ekadashi

प्रश्न: माता तुलसी की शादी किससे हुई थी?
उत्तर: माता तुलसी की शादी भगवान शालिग्राम से हुई थी।

प्रश्न: 2021 में देवउठनी एकादशी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा?
उत्तर: 2021 वर्ष में नवंबर महीने की 14 तारीख को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा।

प्रश्न: भगवान शालिग्राम किन के अवतार है?
उत्तर: भगवान शालिग्राम भगवान विष्णु के अवतार है।

प्रश्न: भगवान विष्णु किस माह में सोते है?
उत्तर: भगवान विष्णु आषाढ़ मास में सोते है।

प्रश्न: भगवान विष्णु किस माह में जागते है?
उत्तर: भगवान विष्णु कार्तिक मास में जागते है।

प्रश्न: भगवान विष्णु किस दिन सोते है?
उत्तर: भगवान विष्णु आषाढ़ मास की एकादशी के दिन सोते है।

प्रश्न: भगवान विष्णु किस दिन जागते है?
उत्तर: भगवान विष्णु कार्तिक मास की देवउठनी ग्यारस के दिन जागते है।

प्रश्न: भगवान विष्णु कितने समय तक सोते है?
उत्तर: भगवान विष्णु 4 माह तक सोते है।

प्रश्न: शादियों का शुभ मुहूर्त कब शुरू होता है?
उत्तर: शादियों का शुभ मुहूर्त कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी से शुरू होता है।

प्रश्न: शादियों का शुभ मुहूर्त कब खत्म होता है?
उत्तर: शादियों का शुभ मुहूर्त आषाढ़ मास की एकादशी के दिन खत्म होता है।

दिवाली पर निबंध 20 लाइन – 20 Lines Essay On Diwali In Hindi

दिवाली! यहां मुख्य रूप से एक भारतीय हिंदुओं का त्यौहार है, जिसे प्रत्येक वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यहां त्यौहार भारत के अलावा भी कई देशों में मनाया जाता है। अब भारत के त्योहारों और यहां की भारतीय संस्कृति को विदेश में बहुत पसंद किया जाता है। दिवाली का त्यौहार भगवान श्री राम के वापस अयोध्या आने के उपलक्ष में मनाया जाता है। यहां त्यौहार प्रकाश का प्रतीक है।

दिवाली पर 20 लाइन में निबंध

1. दिवाली/दीपावली हिंदुओं का मुख्य त्यौहार है, जिसे प्रकाश/रोशनी का प्रतीक माना जाता है।

2. दिवाली का त्यौहार प्रत्येक वर्ष अक्टूबर-नवंबर माह में आता है। इन दिनों शरद ऋतु (ठंड) का आगमन होता है।

3. दिवाली के त्योहार को हिंदी पंचाग के अनुसार प्रतिवर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

4. दिवाली का त्यौहार 5 दिनों का प्रमुख त्योहार है, इन 5 दिनों तक लोग इस त्यौहार को महोत्सव की तरह मनाते है।

5. दिपावली को दीप का त्यौहार भी कहा जाता हैं, क्योंकि दिपावली के दिन पूरे घर-आंगन में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते है।

6. भगवान राम 14 वर्ष के वनवास को पूरा कर व रावण का अंत कर भाई लक्ष्मण व‌ माता सीता के साथ इस दिन अयोध्या नगरी लोटे थे इस अवसर पर अयोध्या वासियों ने श्री राम के स्वागत में दीपक जलाए थे और इस दिन को महोत्सव की तरह मनाया था। तब से लेकर आज तक यह त्यौहार बड़े गर्व ओर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

7. दिवाली के आने से पहले लोग अपने घरों की, व अपनी दुकानों और दफ्तरों की अच्छी तरह सफाई करते हैं।

8. दिवाली की धनतेरस के दिन लोग नई वस्तुएं खरीदते हैं, जैसे नए वाहन, सोने तथा चांदी की आभूषण व सिक्के आदि।

9. इस दिन घर के सभी लोग नए कपड़े पहनते हैं, बड़े दिए जलाते हैं। तथा बच्चे पटाखे जलाकर आतिशबाजी करते हैं।

10. दिवाली के दिन लोग अपने अपने घरों में माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, ओर भगवान गणेश की पूजा अर्चना करते हैं।

11. दिवाली के समय लोग अपने अपने घरों में कई प्रकार की मिठाइयां व व्यंजक बनाते हैं, व पड़ोसी व रिश्तेदारों को आपस में उपहार देते है।

12. दिवाली के समय में लोग अपने वाहनों की अच्छी तरह से साफ सफाई करते हैं वहां उन्हें दिवाली के दिन पूजते हैं, ज्यादातर लोग दिवाली के दिन ही नए वाहन खरीदते हैं।

13. दीवाली के दिनों में लड़कियां अपने घर के बाहर सुंदर-सुंदर रंगोलियां बनाती है।

14. दिवाली के चौथे दिन यानी गोवर्धन पूजा के दिन लोग अपनी गाय और भैंसों को नहलाते हैं और इस दिन उनकी पूजा करते है।

15. गोवर्धन पूजा के दिन महिलाए गोबर से गोवर्धन पर्वत, गाय, भगवान कृष्ण, ग्वाले, सभी को गोबर द्वारा बनाती है और उनकी पूजा करती है।

16. दिवाली का आखरी दिन जिसे हम भाई दूज के रूप में मनाते है, इस दिन शादीशुदा बहन या मुंह बोली बहन अपने भाई को भोजन के लिए आमंत्रित करती है, ओर भाई इस दिन अपनी बहन के घर जरूर जाता है।

17. दिवाली के दिन ही द्वापर युग में पांडव 12 वर्ष का वनवास व 1 वर्ष का अज्ञातवास पूरा कर अपने घर हस्तिनापुर लोटे थे। इस खुशी में हस्तिनापुर वासियों ने पांडवों के आगमन पर खुशियां मनाई थी।

18. दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दिवाली को नरकासुर के वध के कारण मनाया जाता है, नरकासुर एक राक्षस था जिसने इंद्र का ताज चुरा लिया था।

19. सिख धर्म में भी दिवाली का अत्यंत महत्व है, इसी दिन सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर/गोल्डन टेंपल की नींव रखी गई थी।

20. दिवाली के पर्व को अँधेरे पर रोशनी के विजय और सच्चाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

FAQ – दिवाली पर निबंध 20 लाइन

प्रश्न: दिवाली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: इस दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर व रावण का अंत कर कर अपने घर अयोध्या नगरी वापस लौटे थे, इस उपलक्ष्य में दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है।

प्रश्न: दिवाली को किसका प्रतीक माना गया है?
उत्तर: दिवाली को रोशनी का प्रतीक माना गया है।

प्रश्न: दिवाली को हिंदी पंचांग के अनुसार किस दिन मनाया जाता है?
उत्तर: दिवाली को हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

प्रश्न: दिवाली का त्यौहार किस महीने में आता है?
उत्तर: दिवाली का त्यौहार अक्टूबर-नवंबर के महीने में आता है

प्रश्न: दिवाली कितने दिनों का त्यौहार होता है?
उत्तर: दिवाली 5 दिनों का प्रमुख त्यौहार होता है।

प्रश्न: दिवाली के दिन लोग किस भगवान की पूजा करते हैं?
उत्तर: दिवाली के दिन लोग माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, व भगवान गणेश की पूजा करते हैं।

प्रश्न: दिवाली में भाई दूज का क्या महत्व है?
उत्तर: दिवाली में भाई दूज के दिन बहन अपने भाई को भोजन के लिए आमंत्रित करती है, और उनकी दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती है।

प्रश्न: पांडव किस दिन अपना वनवास काट कर घर लौटे थे?
उत्तर: पांडव दिवाली के दिन अपना वनवास काटकर घर लौटे थे।

प्रश्न: भारत का सबसे लंबा त्यौहार कौन सा होता है?
उत्तर: भारत का सबसे लंबा त्यौहार दिवाली का होता है जो लगातार 5 दिन तक चलता है।

प्रश्न: नरकासुर ने किसका ताज चुरा लिया था?
उत्तर: नरकासुर ने इंद्र का ताज चुरा लिया था।

प्रश्न: नरकासुर को क्या वरदान प्राप्त था?
उत्तर: नरकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु केवल उसकी मां सत्याभमा के हाथों ही होगी।

प्रश्न: दिवाली के दिन दिए क्यों जलाए जाते हैं?
उत्तर: दिवाली के दिन भगवान राम घर लौटे थे इस कारण अयोध्या के लोगों ने इस दिन पूरी अयोध्या में दिए जलाए थे और भगवान राम का स्वागत किया था, तब से लेकर आज तक दिवाली के दिन दिए जलाए जाते हैं।

दिवाली का पर्व हमारे देश का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, इस त्योहार को सभी जाति के लोग मिलकर मनाते है, इस त्यौहार को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है, यहां त्यौहार भारत का सबसे लंबा त्यौहार होता है, इस त्यौहार को 5 दिनों तक मनाया जाता है। यहां त्यौहार बच्चों को सर्वाधिक प्रिय है, इस दिन बच्चे नए कपड़े पहनते हैं, खूब मिठाईयां खाते हैं, ओर खूब पटाखे जलाते हैं और आतिशबाजी करते हैं।

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भारत त्योहारों के रूप में जाने जाना वाला देश है। दीपावली या दीवाली यहाँ मनाये जाने वाले त्योहारों में से सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। इस त्योहार को प्रतिवर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है।

Paragraph On Diwali In Hindi

Diwali Paragraph 1

दीपावली का त्यौहार भारत में और अन्य कई देशों में बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता हैं। दीपावली को दीप का त्यौहार भी कहा जाता हैं। दीपावली का त्यौहार भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक हैं। जिसे भारत में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्री-राम ने रावण को पराजित करके और अपने 14 वर्ष के वनवास को पूरा करके अयोध्या वापस लौटे थे। भगवान राम के आने की खुशी में वहां के सभी लोगो ने इस दिन को त्योहार की तरह मनाया था, जगह जगह दिए जलाए थे, अयोध्या नगरी इस दिन रोशनी से जगमगा उठी थी, तब से लेकर आज तक इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता हैं, दीपावली के त्योहार को, वैसे तो सभी मनाते है लेकिन इस दिन बच्चो में अलग ही उत्साह होता है। इस त्योहार को बच्चे, बूढ़े और बड़े हर कोई बहुत ही खुशी और धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन पूरा भारत रोशनी से जगमगा उठता है. इस दिन लोग पटाखे भी जलाते हैं।

दिवाली का त्योहार सभी लोगों को खुशियाँ देनेवाला त्योहार है । इसे दीपावली भी कहते है। यह त्योहार हर साल अक्टूबर या नवम्बर के महीने में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि, इस दिन भगवान राम चौदह साल का वनवास पूरा करके दिवाली के दिन वापस अयोध्या लौटे थे। इस खुशी पर अयोध्या का हर घर, रास्ता फूलों से, दीयों से सजाया गया था। तब से लेकर अब तक यह त्योहार प्रत्येक वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली का त्योहार धनतेरस से भाईदूज तक पाँच दिन मनाया जाता है। दिवाली आने पर लोग अपने घर, दुकान, कार्यालय, अपने वाहनों आदि की साफ सफाई करते है।

Diwali Paragraph 2

दीपावली का त्योहार प्रति वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम चन्द्र जी 14 साल का वनवास पूरा कर तथा रावण का संहार करके लक्ष्मण जी और माता सीता जी के साथ अयोध्या वापिस आए थे। उनके वापिस आने की खुशी में अयोध्या वासियों ने घरों में दीप जलाए थे। इसलिए दीपावली को ‘दीपों का त्योहार’ भी कहा जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

दीपावली का त्योहार पाँच दिनों का त्यौहार है, पहला दिन धनतेरस या धन त्रयोदशी का होता है। इस दिन लोग नए साधन खरीदते है, नए वाहन खरीदते हैं, घर की चीजें खरीदते हैं, इस दिन सोने व चांदी के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है, दूसरा दिन नरक चतुर्दशी, या काली चौदस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से समस्त पाप समाप्त हो जाते है। तीसरा दिन दीपावली का होता है।

बच्चे और बड़े नए कपड़े पहनते है और एक दूसरे को दीपावली की बधाई देते हैं। रात को लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है और उनके स्वागत के लिए दीप जलाए जाते है, घरों में अलग-अलग तरह की मिठाईयाँ बनाई जाति है। बच्चे पटाखे जलाते है, दीपावली के दिन पूरा भारत रोशनी से जगमगा उठता है। चौथा दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा का होता है, इस दिन किसान अपने गाय, भेस व बैल की पूजा करते हैं। पांचवे दिन को भाई दूज के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। भाई दूज को भाई-बहन का एक पवित्र दिन भी माना जाता है। इस दिन भाई अपनी वैवाहिक बहन यह मुंह बोली बहन के यहां भोजन करने के लिए जाते हैं इस दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाती है और उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है।

Diwali Paragraph 3

दिवाली के दिन लोग अपने नए कार्यों का शुभारंभ करते है, इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है, लोग इस दिन सोने-चांदी के गहने व बर्तन आदि खरीदते हैं, लोग इस दिन नए साधन अपने घर लाते हैं। घर के सभी सदस्य अपने लिए नए कपड़े खरीदते हैं। अपने घरों व दुकानों को सजाते हैं, दिवाली आने पर लोग अपने घर, दुकान, कार्यालय आदि को रंगबिरंगे फूलों से, दीपों से, सुंदर रंगोलियों से सजाते है।

दीपावली के दिन से ही लोग अपने घरों पर दिए जलाते हैं। एक दूसरे को मिठाईयाँ बाटते है, किसान दिवाली में गाय-भैंसों की पूजा करते है। व्यापारी लोग नए खाते लिखते है। लोग देवी लक्ष्मीमाता, देवी सरस्वती माता, और भगवान गणेशजी का पूजन करते है।

दिवाली में ठंड की शुरुआत होती है, हर साल दिवाली आती है और चली जाती है; मगर मन में नयी उमंग भर जाती है। दिवाली सभी को प्यार, एकता, भाईचारा और आनंद का संदेश देती है।

दीपावली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं । भारत ही नहीं बल्कि और भी देशों में दीपावली का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

दशहरा क्यों मानते है ? दशहरा कैसे मानते है ? दशहरा का महत्व 2021

दशहरा (विजयदशमी) का त्योहार हमारे देश मे प्रतिवर्ष आश्विन मास की दशमी तिथि को मनाया जाता है, यह त्यौहार लोगों द्वारा बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। खासकर बच्चो को दशहरा त्यौहार सर्वाधिक प्रिय है। यह दिन हमे बुराई पर अच्छाई की व असत्य पर सत्य की जीत की प्रेरणा देता है, परंतु आपको क्या ये पता है की दशहरा क्यों मनाया जाता है। आज हम आपको ट्रेंडी हिंदी के माध्यम से बताते हैं, की दशहरा क्यों मनाया जाता है।

दशहरा 2021 में कब  है? (Dussehra 2021 Date) –

विजयदशमी का त्योहार नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है, यह प्रत्येक वर्ष अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, 2021 में यह त्योहार 15 अक्टूबर के दिन यानी शुक्रवार को मनाया जाएगा।

दशहरा पर्व की कहानी  क्या है , क्यों मनाया जाता है? (Dussehra Festival story)

दशहरा पर्व से जुड़ी कथाएं –

दशहरा का त्योहार हमारे देश में कई कारणों से मनाया जाता है, जैसे श्री राम की रावन पर विजय के उपलक्ष्य में दशहरा मनाया जाता है, अथवा इस दिन राक्षस महिसासुर का वध कर दुर्गा माता विजयी हुई थी, और इसी दिन पांडवों का वनवास के रूप में और भी कई जगहों पर दशहरा का अपना अलग अलग महत्व है।

भगवान श्री राम द्वारा रावण का वध:

दशहरे का त्योहार कई कारणों से प्रचलित है, जिसमे से सबसे प्रचलित कथा श्री राम व रावण युद्ध की है, श्री राम भगवान विष्णु के अवतार थे जो की धरती पर पाप, ओर अहंकार, को मिटाने के लिए आए थे।

अयोध्या नगरी के राजा दशरथ के चार पुत्र थे, राम, लक्ष्मण, भरत, ओर शत्रुघ्न । राम सबसे बड़े बेटे थे व अयोध्या के होने वाले राजा थे, परंतु क्षत्रिय धर्म के कारण व पिता दशरथ के वचनों के कारण राजकुमार राम, भाई लक्ष्मण और पत्नी देवी सीता के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए गए थे।

रावण जो कि एक महाबली अहंकारी पुरुष था, वहां अपनी सोने की लंका में रहता था, रावण चतुर्वेदो का ज्ञाता था, ओर भगवान शिव का भक्त था, रावण एक ब्राह्मण था, जिसे सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान था, रावण के पिता विशर्वा थे जो एक ब्राह्मण थे एवं रावण की माता राक्षस कुल की थी, इसी कारण रावण में ब्राह्मण की तरह ज्ञान, व राक्षस के सामान अहंकार और कई शक्तियां थी।

रावण की बहन शूर्पणखा ने एक बार माता सीता का अपमान किया था जिसके चलते लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काट दी थी, राक्षस रावण अपनी बहन का बदला लेने के लिए भगवान श्री राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था।

देवी सीता को बचाने के लिए श्री राम लंका गए और वहां उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया था। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। श्री राम की विजय के उपलक्ष्य में इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है।

दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए भी मनाया जाता है, और इससे यह साबित होता है, की बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है, और बुराई पर अच्छी अच्छी की जीत होती है।

दशहरा मेला-

दशहरा पर्व भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है, सभी जगहो पर मेलों का आयोजन होता है, जहां बच्चो के लिए खिलोने, खाने पीने की दुकानें और भव्य दुकानों का अयोजन होता है।

इस दिन घर के सभी व्यक्ति कासकर बच्चे दशहरे मैदान पर घूमने के लिए जाते हैं. कई लोग तो अपने परिवार वालो के साथ और कई अपने दोस्तो के साथ दशहरा मेला घूमने के लिए जाते हैं। जहां तरह तरह की वस्तुएं देखेनें को मिलती है।

दशहरा में रामलीला आयोजन

दशहरे के दिन रामलीला का आयोजन बड़ी धूम – धाम से होता है, इस दिन देश के हर कोनों में भव्य रामलीला का आयोजन किया जाता है, उस दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले को जलाया जाता है, जिसमें रावण का पुतला सबसे बड़ा बनाया जाता है और उसके 10 सर बनाए जाते हैं, भगवान श्री राम के हाथो पुतलो में अग्नि लगाई जाती है। सर्वप्रथम कुंभकर्ण का पुतला जलाया जाता है, उसके बाद मेघनाथ के पुतले में आग लगाई जाती है। और सबसे आखिर में रावण के पुतले को जलाया जाता है। जिन्हे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग आते हैं।

दशहरा पर कविता एवम शायरी (Dussehra Kavita Shayari in Hindi)

विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

जिस प्रकार भगवान राम द्वारा रावण को जलाया जाता है,
ओर बुराई को नष्ट कर दिया जाता है,
उसी प्रकार हमे भी अपने अंदर छुपी बुराइयों को नष्ट कर देना चाहिए।

आशा करते है, दशहरा पर आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा, आशा करते है आप इस लेख को शेयर जरूर करेंगे, जिससे अधिकतम लोगों को दशहरा के बारे में पता चल सके।

आपके लिए-

दिवाली क्यों मनाते है? दिवाली केसे मनाते है? दिवाली का महत्व 2021

दिवाली! यह हिंदू धर्म का सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है, जो वर्ष के अक्टूबर-नवंबर माह में आता है, जिसमें परिवार के सभी लोग धन, सुख व ज्ञान प्राप्ती के लिए माता सरस्वती, माता लक्ष्मी, श्री गणेश व कुबेर जी की पूजा, अर्चना करते हैं, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दिवाली भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दिवाली को लोग बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

#दिवाली का महत्व

त्रेतायुग में दिवाली!

दिवाली! कहा जाता है। जब त्रेतायुग में राजा दशरथ द्वारा दिए गए 14 वर्ष के वनवास को पूरा कर व रावण का अंत कर भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण व‌ माता सीता के साथ अपने घर अयोध्या नगरी लौट रहे थे, तब अयोध्यावासी ने भगवान श्री राम के स्वागत में घर-घर दिए जलाए, और उनके आगमन को एक उत्सव की तरह मनाया, उस दिन अयोध्या नगरी दिए की लो से जगमगा उठी थी। तभी से यहां दिन दिवाली/दीपावली के रूप में मनाया जाता है। ‌दिवाली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है, भगवान श्रीराम ने लंकेश्वर रावण का अंत कर बुराई पर अच्छाई की जीत प्राप्त की थी।

द्वापर युग में दिवाली!

दिवाली! भारत के सबसे बड़े महाकाव्यों मैं से एक है, महाभारत के अनुसार द्वापर युग में पांडव 12 वर्ष का वनवास व 1 वर्ष का अज्ञातवास पूरा कर अपने घर हस्तिनापुर लौट रहे थे, इस खुशी में हस्तिनापुर वासियों ने पांडवों के आगमन पर खुशियां मनाई, दीप जलाएं एवं हस्तिनापुर को अच्छी तरह सजाया तभी से देश में दीपावली मनाई जाती है।

दक्षिण भारत में दिवाली का महत्व!

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दिवाली नरकासुर के वध के कारण मनाई जाती है, नरकासुर एक राक्षस था, जिसने इंद्र की मां का ताज चुरा लिया था, इंद्र भयभीत होकर भगवान श्री कृष्ण से सहायता प्राप्त करने के लिए जाते हैं, और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वह इस दुविधा से उनको बाहर निकाले, भगवान श्री कृष्ण सत्याभमा के साथ स्वर्ग जाते हैं, व नरकासुर के वध के लिए तैयार रहते हैं, परंतु नरकासुर को वरदान प्राप्त था कि उनकी मां के हाथों से ही उनकी मृत्यु हो सकती है, जब भगवान श्री कृष्ण को पता चलता है कि सत्याभमा और कोई नहीं नरकासुर की मां ही थी, तब नरकासुर सत्यभामा के हाथों मारा जाता है, और श्री कृष्ण खोया हुआ ताज इंद्र की मां को लौटा देते हैं। बुराई पर हुई इस जीत के कारण दक्षिण भारत में दीवाली मनाई जाती है।

सिख धर्म में दिवाली का महत्व!

सिख धर्म में भी दिवाली का अत्यंत महत्व है दिवाली के दिन ही सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोविंदजी व 52 अन्य राजाओं के साथ ग्वालियर के कारागृह से 1619 ई. में रिहा हुए थे, तब सिखों ने बड़ी धूमधाम से दिवाली का त्यौहार मनाया था, और दिवाली के दिन ही सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर/गोल्डन टेंपल की नींव रखी गई थी।

#धनतेरस:

धनतेरस क्या है व इसे कैसे मनाते है?
What is Dhanteras and how is it celebrated?

धनतेरस को कार्तिक माह की त्रयोदशी या दिवाली के 2 दिन पहले मनाया जाता है, पौराणिक कथा के अनुसार धनतेरस भगवान धन्वंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष में भी मनाया जाता है। इस दिन को सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है, धनतेरस के दिन सोने-चांदी आदि की वस्तुएं, आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है, धनतेरस के दिन से ही घरों में दीप जलाए जाते हैं। इस दिन लोग सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन व सिक्के खरीदते हैं, बच्चे, बूढ़े सभी उम्र के लोग आज नए-नए कपड़े खरीदते हैं। पटाखे खरीदते हैं, और ज्यादातर लोग इसी दिन घर से संबंधित सामान जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन, टीवी, व यातायात से संबंधित कार, बाइक व अन्य यातायात के साधन खरीदते हैं।

#दिवाली/दीपावली:

दिवाली केसे मनाते है?
How do you celebrate Diwali?

दिवाली के दिन अंतरिक्ष से भारत का एक अलग ही स्वरूप दिखाई देता है, घर में हर जगह दिए व भिन्न-भिन्न कलर की लाइटें लगाई जाती है जो घर को जगमगा देती है, घर के आंगन में रंगोलीया बनाई जाती है। बच्चे पटाखे फोड़ते हैं, और इस उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

दीपावली से कई हफ्ते पहले घर के लोग घर, ऑफिस, अपनी गाड़ियां एवं निजी वस्तुओं की साफ-सफाई में जुट जाते हैं। घर में कई तरह की मिठाइयां व अन्य सामग्री बनाई जाती है। घर को नए कलर से पोता जाता है, सभी लोग अपने लिए नए-नए कपड़े खरीदते हैं, बच्चे पटाखे जलाते हैं। लोग आपस में मिलते हैं और अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। एक दूसरे को मिठाइयां अन्य सामग्री गिफ्ट देते हैं।

रात के समय परिवार के सभी लोग एकत्रित होकर माता लक्ष्मी, ज्ञान की देवी माता सरस्वती, श्री गणेश व कुबेर जी के साथ-साथ अपने धन की पूजा करते हैं, और उनसे सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके बाद लोग अपने संसाधनों की पूजा करते हैं। आज ही से हिंदुओं का नया वर्ष भी प्रारंभ होता है।

#गोवर्धन पूजा:

गोवर्धन पूजा क्या है व इसे कैसे मनाया जाता है?
What is Govardhan Pooja and how is it celebrated?

गोवर्धन पूजा के दिन गाय माता की पूजा की जाती है, इसके साथ साथ अन्य पशु भैंस, बेल की भी पूजा की जाती है। भारत के इतिहास में गाय माता को बहुत पवित्र माना गया है। गाय को माता लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा जाता है।
जब इंद्र के क्रोध से बृजवासी को भगवान श्री कृष्ण ने मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली से उठाकर बृजवासी, गायों को शरण देकर उन्हें बचाया था। तथा इंद्र का अभिमान चूर-चूर कर दिया था। तभी से इस दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाते हैं, जिसमें गोबर से गोवर्धन पर्वत, गाय, भगवान कृष्ण, ग्वाले, सभी को गोबर द्वारा बनाकर उनकी पूजा की जाती है।

#भाई दूज:

भाई दूज क्या है व इसे कैसे मनाते है?
What is brother duo and how do it celebrate?

भाई दूज! भाई दूज को भाई-बहन का एक पवित्र दिन भी माना जाता है। इस दिन भाई अपनी वैवाहिक बहन यह मुंह बोली बहन के यहां भोजन करने के लिए जाते हैं व दोनों के बीच में स्नेह बढ़ता है। बहन अपने भाई की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती है

बताया जाता है कि भगवान सूर्यदेव की पत्नी छांया के दो पुत्र-पुत्री थे यमुना और यमराज, यमुना अपने भाई यमराज से अति स्नेह करती थी एवं वहां तत्पर रहती थी कि यमराज उनके यहां आएं और भोजन करें, परंतु यमराज हमेशा व्यस्त रहते थे वे आ नहीं सकते थे। एक दिन अमावस्या की दूज के दिन बहन यमुना ने देखा कि यमराज उनके घर के द्वार पर खड़े थे, उन को देखकर यमुना बेहद खुश हो गई एवं उनका सादर सत्कार करने लगी यमराज को भोजन करवाया। और यमराज के जाते समय यमुना ने एक वचन मांगा कि वहां हर साल कार्तिक माह की अमावस की दूज के दिन उनसे मिलने आएंगे। तभी से इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।

स्वास्थ्य ही धन है निबंध (450 शब्द) – Health Is Wealth Hindi Essay

स्वास्थ्य ही धन है निबंध (शब्द 450) – Essay On Health Is Wealth In Hindi

‘स्वास्थ्य ही धन है’ यह कहावत पूर्णत सत्य है, हमारा स्वास्थ हमारे लिए सबसे कीमती चीज है, अच्छा स्वास्थ ही हमारा असली धन है। अस्वस्थ व्यक्ति अपनी पसंद का कुछ भी करने के योग्य नहीं रहता है, वहा कभी न कभी किसी न किसी काम के करने के योग्य नहीं रहता है। एक अस्वस्थ व्यक्ति अपने जीवन से रुचि खो देता है, वह कहीं न कहीं किसी मानसिक व शारीरिक पीड़ा से गुजर रहा होता है। स्वस्थ व्यक्ति वही है जो मानसिक एवं शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ हो, स्वस्थ व्यक्ति हमेशा मानसिक एवं शारीरिक रूप से सकारात्मक रहता है, स्वस्थ व्यक्ति सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्त रहता है। वह हमेशा सक्रिय एवं चुस्त-दुरुस्त रहता है।

Health Is Wealth Essay In Hindi

एक अस्वस्थ व्यक्ति न चाहते हुए भी कई पैसे चिकित्सा पर खर्च कर देता है, ओर तब भी वह खुश नही रहता है। वही एक ओर स्वस्थ व्यक्ति को चिकित्सा पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती। वह हमेशा खुश रहता है, वही दूसरी ओर, एक अस्वस्थ व्यक्ति हमेशा तनावग्रस्त रहता है। वह उचित तरीके से काम करने योग्य नहीं रहता है। यह उसकी कमाई को भी प्रभावित करता है। उसका परिवार भी उससे खुश नहीं रहता है। उसके अधिकांश पैसे तो डॉक्टरों के पास चले जाते हैं। वह अपने जीवन का आनंद लेने में असमर्थ रहता है। वह अपने परिवार के लिए बोझ जैसा होता है। अच्छा स्वास्थ्य स्वस्थ आदतों से प्राप्त किया जा सकता है। अच्छा खाना, व्यायाम, ध्यान, सकारात्मक सोच एवं स्वस्थ आचार-व्यवहार अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। हमारा आहार सभी आवश्यक पोषको से पूर्ण होना चाहिए।

एक स्वस्थ व्यक्ति हमेशा तनाव से कोसो दूर रहता है, वही एक अस्वस्थ व्यक्ति तनाव में ही रहता है, एक स्वस्थ व्यक्ति अपने स्वास्थ को केसे खराब करता है वह लंबे समय तक काम करता रहता है, न सही से अच्छा खाना खाता है, न ही कोई शारीरिक रूप से कोई कसरत करता है। इससे वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है, काम आपको पैसे दे सकता है, लेकिन शारीरिक व मानसिक क्षमता से अधिक काम करना ये आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है। आपका सुख चैन छीन लेता है।

हमें समझना चाहिए कि यदि हम स्वस्थ नहीं हैं, तो ना तो हम हमारी कमाई का व ना ही अपने जीवन का आनंद ले सकते है। स्वस्थ व्यक्ति वास्तव में धनी होता है। उसके पास सुखमय जीवन का धन होता है। यदि एक धनी व्यक्ति अस्वस्थ है, तो उसका सारा धन उसके लिए बेकार है।

अतः हमे अपने स्वास्थ का ध्यान रखना चाहिए, एवं स्वस्थ आदतों को अपनी आदत बनाना चाहिए।

आपके लिए –

स्वास्थ्य पर 9 लाइनें-

1. हमारे जीवन में हमारे शरीर का स्वस्थ होना बहुत ही जरूरी है।
2. अपने स्वास्थ का ध्यान रखना हमारा पहला कर्तव्य होना चाहिए।
3. एक स्वस्थ व्यक्ति हमेशा मानसिक तनाव से दूर रहता है।
4. एक अच्छे स्वास्थ के लिए अच्छा भोजन करना सबसे जरूरी है।
5. एक स्वस्थ व्यक्ति अपने सभी कार्यों को पूरे उत्साह के साथ पूर्ण करता है।
6. स्वस्थ व्यक्ति से बीमारिया कोसो दूर रहती है।
7. ‘विश्व स्वास्थ दिवस’ प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाता है!
8. एक स्वस्थ व्यक्ति कठिन से कठिन कार्यों को सुगमता से कर सकता है।
9. जिस व्यक्ति का स्वास्थ अच्छा होता है वह असल में धनी व्यक्ति होता है, क्योंकि सबसे बड़ा धन एक अच्छा स्वास्थ होता है।

तो यह था स्वास्थ्य ही धन है निबंध (450 शब्द) आशा करते है, यह आपको पसंद आया होगा।

स्वच्छता का महत्व पर निबंध 500 Words

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स्वच्छता पर छोटे और बड़े निबंध – Essay On Cleanliness

स्वच्छता पर निबंध (शब्द 500)

स्वच्छता का महत्व पर निबंध

प्रस्तावना:

साफ सफाई हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह हमारे जीवन की प्राथमिकता भी है। स्वच्छता जरूरी है क्योंकि साफ – सफाई से हम जीवन में आने वाली कई परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं। स्वच्छता का अर्थ है सफाई से रहने की आदत। सफाई से रहने से जहां शरीर स्वस्थ रहता है, वहीं स्वच्छ तन और मन दोनों खुशी के लिए आवश्यक है, स्वच्छता को सभी लोगों को अपनी दिनचर्या में अवश्य ही शामिल करना चाहिए।

स्वच्छता का महत्व:

अभी कोरोना काल में रोगियों की बढ़ती जनसंख्या एवं अस्पतालों में साफ-सफाई को ध्यान देने की आवश्यकता से यह बात और भी स्पष्ट हो गई है कि जीवन में स्वच्छता की कितनी जरूरत है। जीवन में स्वच्छता से तात्पर्य स्वस्थ होने से है। स्वच्छता एक अच्छी आदत है जो हमारे जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाती है। यह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। हमारे लिए शरीर की भी स्वच्छता जरूरी है, जैसे रोज नहाना, स्वच्छ कपड़े पहनना, दांतों की सफाई करना, नाखून काटना, आदि। इसके लिए प्रतिदिन हमें सुबह जैसे ही हम सोकर उठते हैं, अपने दांतों को साफ करना चाहिए। साथ ही स्नान आदि और दैनिक क्रियाओं को समय पर पूर्ण करना चाहिए।

स्वच्छ भारत अभियान:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान 2 अक्टूबर 2014 को गांधीजी की 145 वीं जयंती पर चलाया गया एक अभियान है। यह अभियान दिल्ली के महत्वपूर्ण स्थान राजघाट से शुरू किया गया था। यह एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जो भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के अंदर कई योजनाएं शामिल की गई है, जिसमें ग्रामीण इलाको में शौचालय निर्माण प्रमुख हैं, जिससे लोग आस – पास की स्वच्छता का महत्व समझेंगे और वातावरण को स्वच्छ रखेंगे।

अस्वच्छता से हानियां:

जब लोग ऐसे स्थानों पर रहते हैं जहाँ पर चारों तरफ कूड़ा – कचरा फैला होता है और नालियों में गंदा पानी और सड़ती हुई वस्तुएं पड़ी रहती हैं जिसकी वजह से उस क्षेत्र में बदबू उत्पन्न हो जाती है, ऐसे स्थानों से गुजरना भी बहुत मुश्किल हो जाता है ऐसे स्थानों पर लोग अनेक प्रकार की संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। वहां की गंदगी से जल, थल, वायु आदि पर भी बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ता है।

उपसंहार:

देश में स्वच्छता रखना केवल सरकार का ही नहीं अपितु सभी का कर्तव्य होता है। देशवासियों को मिलकर स्वच्छता के प्रति अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए। समाज के सभी सदस्यों को आस-पास की सफाई में अपना योगदान देना चाहिए। नदियों, तालाबों झीलों और झरनों के पानी में गंदगी को जाने से रोकने के लिए सभी को अपना योगदान देना चाहिए। सरकार को भी वायु में मिलने वाले तत्वों की प्रक्रिया पर रोक लगानी चाहिए। हमें अधिक-से-अधिक पेड़ लगाकर वायु को शुद्ध करना चाहिए। मनुष्य में स्वच्छता का विचार उत्पन्न करने के लिए शिक्षा का प्रचार करना चाहिए। शिक्षा पाने से ही मनुष्य खुद स्वच्छता की ओर प्रवृत हो जाता है। स्वच्छता उत्तम स्वास्थ्य का मूल होता है।

अन्य पढ़े-

दशहरा पर निबंध – Dussehra Par Nibandh Hindi

दशहरा (विजयादशमी), यहां हिंदुओ का मुख्य त्योहार है। यह त्योहार प्रतिवर्ष हिंदी माह के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन पूरे देश में बडी धूमधाम से मनाया जाता है, ये एक धार्मिक और पारंपरिक त्यौहार है, हिंदू धर्म के विद्वानों और ऐतिहासिक मान्यताओं और प्रसिद्ध हिन्दू धर्मग्रंथ रामायण के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने राक्षस रावण का वध किया था। उसी दिन से दशहरा उत्सव मनाया जा रहा है।

दशहरा निबंध (शब्द सीमा 450+ शब्द)

दशहरा पर निबंध Essay on Dussehra 430 Words

Dussehra Par Nibandh

प्रस्तावना

दशहरा महोत्सव पूरे देश में बडी धूम धाम से मनाया जाता है, इस दिन बड़े मैदानों में हजारों की संख्या में लोग रावण दहन को देखने आते है, जिसमे रावण का विशाल पुतला बनाया जाता है, ओर एक पात्र भगवान राम के हाथो से उस पुतले को जलाया जाता है। इसी दिन से नो दिन पहले देश के लगभग हर कोनों में रामलीला आयोजित की जाती है। ओर दसवें (दशहरे) दिन रावण का पुतला जलाया जाता है।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

ऐतिहासिक मान्यताओं और प्रसिद्ध हिन्दू धर्मग्रंथ रामायण के अनुसार जब भगवान श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या को छोड़कर 14 वर्ष के वनवास के लिए गए थे तब रावण की बहन शूर्पणखा ने माता सीता का अपमान किया था, उसके चलते लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काट दी थी, उसका बदला लेने के लिए रावण ने सीता माता का अपहरण कर लिया था। भगवान राम माता सीता को वानरों की सेना के साथ ढूंढते ढूंढते लंका पहुंच गए थे, और वहां उन्होंने कई दिनों तक रावण से युद्ध किया, भगवान राम देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया था, भगवान राम की विजय के प्रतीक स्वरूप इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है।

प्राचीन काल में दशहरा

प्राचीन काल में राजा, महाराजा इस दिन अपनी विजय के लिए प्रार्थना करते थे और रण यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, लोभ, हिंसा, क्रोध, मोह, माया, अहंकार, आलस्य, मत्सर, ओर चोरी जैसे अवगुणों को त्यागने की प्रेरणा हमें देता है।

आज के समय में दशहरा-

आज के दिन में भी लोग अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते है। दशहरे के पवित्र दिन लोग अपने नए कार्यों की शुरुवात करते है। इस दिन क्षत्रियों के यहां शस्त्र की पूजा होती है।लोग ओर अपने उपकर्णों, शस्त्र, ओर वाहनों की पूजा करते है। बच्चे, बड़े सभी अपने अपने घरों में रावण का पुतला बनाते है और उसे जलाते है।

निष्कर्ष

भगवान श्री राम ने माता सीता को राक्षस रावण के चुंगुलो से बचाने के लिए रावण पुत्र मेघनाथ और भाई कुम्भकर्ण को हराकर और अतिम में रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी। इस कारण लोग आज दशहरे का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाते है, और रावण का पुतला बनाकर उसे जलाते हैं।

दशहरा पर निबंध (300+ शब्द)

दशहरा पर निबंध 300 शब्द – Essay on Dussehra 300 words

प्रस्तावना-

दशहरा हिंदुओं का मुख्य त्यौहार है। दशहरा आश्विन मास की दसवीं तिथि को मनाया जाता है। इसी महीने में गुलाबी ठंड का आगमन होता है। इस दिन भगवान रामचन्द्र जी रावण का संहार करते है और विजय प्राप्त करते है।

रामलीला मैदान

दशहरे से 10 दिन पहले रामलीला का आयोजन किया जाता है। दशहरे का महत्व रामलीलाओं के कारण और भी बढ़ जाता है। भारत के हर शहर, हर गांव व हर गली, मोहल्ले में, रामलीला का आयोजन होता है। दिल्ली में दिल्ली गेट के करीब रामलीला मैदान की रामलीला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। वहां पर लाखों लोग रामलीला देखने के लिए आते हैं, यहां तक की दशहरे के दिन देश प्रधानमंत्री व अन्य कई बड़ी बड़ी हस्तियां भी रामलीला को देखने के लिए आते हैं।

रामलीला आयोजन

दशहरे के दिन मनोरंजक मेले का आयोजन भी होता है। उस दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले को जलाया जाता है। दशहरे के दिन रावण का पुतला सबसे बड़ा बनया जाता है। उसके दस सिर होते हैं। ज्यादातर लोग तो सिर्फ पुतले को देखने आते हैं। रामलीला में दशहरे के दिन आतिशबाजी देखने लायक होती है जो दर्शकों को बहुत पसंद आती है। अनेक नगरों में तो आतिशबाजी की प्रतियोगिता भी होती है। पहले भगवान श्री राम के हाथो पुतलो में अग्नि लगाई जाती है। सर्वप्रथम कुंभकर्ण का पुतला जलाया जाता है, उसके बाद मेघनाथ के पुतले में आग लगाई जाती है। और सबसे आखिर में रावण के पुतले को जलाया जाता है।
जेसे ही रावण का पुतला जलाया जाता है वैसे ही सभी लोग अपने घर की ओर जाने लगते हैं कुछ ही समय में पूरा भरा मैदान खाली हो जाता है।

निष्कर्ष-

असत्य पर सत्य की जीत के उपलक्ष्य में आज के दिन लोग अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और आज के दिन लोग नई-नई वस्तुएं खरीदते हैं, और अपने यंत्रों की पूजा करते हैं।

दशहरा निबंध (शब्द सीमा 400)

दशहरा पर निबंध शब्द सीमा 400 – Essay on Dussehra word limit 400

प्रस्तावना-

दशहरा (विजयदशमी) का त्योहार हमारे देश मे प्रतिवर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला दशहरे का त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, और शौर्य का उपासक है, यह दिन हमे बुराई पर अच्छाई की व असत्य पर सत्य की जीत की प्रेरणा देता है।

राम और रावण का युद्ध-

राक्षस रावण अपनी बहन का बदला लेने के लिए भगवान श्री राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। देवी सीता को बचाने के लिए श्री राम लंका गए और वहां उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया था। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। श्री राम की विजय के उपलक्ष्य में इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है।

दशहरे की रामलीला-

दशहरे के दिन देश के हर कोनों में भव्य रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसको देखने के लिए लोग हजारों की संख्या में आते है, जिसमे रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतले बनाकर उसे भगवान श्री राम के हाथो जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाता है।

दशहरा मेला-

दशहरा पर्व भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी मनाया जाता है, सभी जगह बड़े बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है, जहां हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते है। मेला गुमने के लिए लोग अक्सर अपने परिवार व दोस्तों के साथ आते हैं, मेले में तरह तरह की वस्तुएं मिलती है, ओर कई प्रकार के खाने की चीजे भी मिलती है। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला सबसे प्रसिद्ध है।

असत्य पर सत्य की जीत

भगवान श्री राम ने इसी दिन असुर रावण का वध किया था। इस दिन को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को लोग बड़ी धूमधाम के साथ मनाते है, लोग इस दिन को बहुत शुभ मानते है और अपने नए कार्य का प्रारंभ करते है और नई नई चीजे खरीदते है, इस दिन शस्त्र-पूजा, वाहन पूजा की जाती है।

निष्कर्ष-

बुराई पर अच्छाई की विजय, के उपलक्ष्य में इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और आग के तीर से इन पुतलों को मारते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

दशहरे का त्यौहार असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय भी कहा जाता है। इस दिन श्रीराम ने बुराई के प्रति रावण का संहार किया था।

अत: हमें भी अपनी बुराइयों को त्याग कर अच्छाइयों को स्वीकार करना चाहिए, तभी इस दिन की वास्तविक महिमा व गरिमा स्थापित हो सकती है।

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तो यह था दशहरा पर निबंध आशा करते है यह आपको पसंद आया होगा।

10 Best Lines On Mahatma Gandhi In Hindi – महात्मा गांधी पर 10 लाइन

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आज हम आपको हमारे देश के राष्ट्रपिता और हम सबके प्रिय ‘बापू ‘ के बारे में 10 लाईन बताने वाले है, गाँधी जी इतने महान और अनुशाशनीय थे की उनके बारे में जितना भी कहे कम ही है, हमे पता है की महात्मा गांधी से जुड़े कई सारे किस्से है, अगर हम उन सभी किस्सों का लेख करे तो लफ्ज़ कम पड़ जाए, पर महात्मा गांधी से जुड़े किस्से खत्म नहीं होंगे, पर हम आज उनसे जुड़ी 10 जानकारियां आपको बताने वाले है।

Gandhi ji par 10 lines – महात्मा गांधी पर 10 लाइन

  1. देश के राष्ट्रपिता और अहिंसा के रक्षक महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1969 को काठियावाड़ के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था जो की गुजरात में स्थित है।
  2. महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है।
  3. भारतीयों द्वारा महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’, या ‘बापू’ के नाम से संबोधित किया जाता हैं।
  4. महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी था, जो राजकोट में दीवान थे, इनकी माता का नाम पुतली बाई था, जो एक आदर्श नारी थी। गांधीजी की पत्नी का नाम कस्तूरबा बाई था, जिन्होंने गांधीजी का आजीवन साथ दिया था।
  5. महात्मा गांधी के जन्मदिवस के रूप में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है और इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है।
  6. गांधीजी की शुरुआती शिक्षा राजकोट में हुई थी, मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर 1888 में वह आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। 1891 में गांधीजी बैरिस्टर बनकर भारत लौटकर आए थे।
  7. गांधीजी ने मुंबई से वकालत आरंभ की थी, वह गरीबों के मुकदमे निशुल्क लड़ा करते थे।
  8. महात्मा गांधी सदैव सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते थे, अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही उन्होंने देश को आजाद करवाया था।
  9. 1893 में गांधीजी को एक गुजराती व्यापारी के मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा था, वहां उन्हें कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। यहां तक की उन्हें अदालत में पगड़ी उतारने के लिए विवश किया गया था, उन्हें रेलगाड़ी के डिब्बे से धक्का देकर बीच रास्ते में उतार दिया गया था, उस समय रंगभेद की इस नीति का गांधीजी ने जम कर विरोध किया था। उन्होंने वहां कई अपमान सहे थे लेकिन वह डरे नहीं, आखिर में वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री जनरल स्मट्स को गांधीजी के सामने झुकना पड़ा था।
  10. महात्मा गांधी 125 वर्षों तक जीना चाहता थे, और हमारे भारत देश को एक आदर्श देश बनाना चाहते थे, लेकिन उनकी मृत्यु 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति के हाथों हुई थी।

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FAQ About Mahatma Gandhi-

प्रश्न: महात्मा गांधी को प्यार से लोग किस नाम से बुलाते थे?
उत्तर: महात्मा गांधी को लोग प्यार से बापू बुलाते थे।

प्रश्न: महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ था?
उत्तर: महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1969 को हुआ था।

प्रश्न: महात्मा गांधी का जन्म कहां हुआ था?
उत्तर:महात्मा गांधी का जन्म काठियावाड़ के पोरबंदर (गुजरात) नामक स्थान पर हुआ था।

प्रश्न: महात्मा गांधी का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है।

प्रश्न: महात्मा गांधी के पिता का नाम क्या है?
उत्तर: महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी है।

प्रश्न: महात्मा गांधी की माता का नाम क्या है?
उत्तर: महात्मा गांधी की माता का नाम पुतलीबाई है।

प्रश्न: महात्मा गांधी की पत्नी का नाम क्या है?
उत्तर: महात्मा गांधी की पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी है

प्रश्न: महात्मा गांधी को राष्ट्र का कौन सा दर्जा प्राप्त है?
उत्तर: महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता है। इन्हे राष्ट्र के पिता का दर्जा प्राप्त है।

प्रश्न: महात्मा गांधी किस सन् में अफ्रीका गए थे?
उत्तर: महात्मा गांधी सन् 1893 में अफ्रीका गए थे।

प्रश्न: महात्मा गांधी कितने वर्ष तक अफ्रीका में रहे थे?
उत्तर: महात्मा गांधी 20 वर्ष तक अफ्रीका में रहे थे।

प्रश्न: महात्मा गांधी ने शुरुवाती पढ़ाई कहां से की है?
उत्तर: महात्मा गांधी ने शुरुवाती पढ़ाई राजकोट से की है?

प्रश्न: महात्मा गांधी किस वर्ष इंग्लैंड गए थे और क्यों?
उत्तर: महात्मा गांधी बेरिस्टर की पढ़ाई के लिए सन् 1888 को इंग्लैंड गए थे।

प्रश्न: महात्मा गांधी की मृत्यु कब हुई थी?
उत्तर: महात्मा गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को हुई थी।

प्रश्न: महात्मा गांधी की मृत्यु किसके हाथों हुई थी?
उत्तर: महात्मा गांधी की मृत्यु नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति के हाथों हुई थी।

प्रश्न: महात्मा गांधी की मृत्यु कब और किसके साथ हुई थी?
उत्तर: महात्मा गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति के हाथों हुई थी।

तो ये थी महात्मा गाँधी जी पर 10 लाइन आशा करते है, यह आपको पसंद आई होगी।

2 अक्टूबर गाँधी जयंती पर निबंध – Essay On Gandhi Jayanti In Hindi

इस भारतवर्ष में कुछ व्यक्ति महामानव के रूप में जन्मे है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और अपनी मजबूत छाया के चलते पूरी दुनिया भर में अपने देश का नाम रोशन किया है। उनमें से एक महान विभूति का नाम है महात्मा गांधी

गाँधी जयंती निबंध – Gandhi Jayanti Par Nibandh

हम भारतीय महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’, या ‘बापू’ के नाम से संबोधित करते हैं, बापू अहिंसा के प्रणेता, सत्य का साथ देने वाले, अछूतों के समर्थक व राष्ट्र के पिता थे। बापू ने अंग्रेजों द्वारा पीड़ित भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

सत्य व अहिंसा की ज्योत जगाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1969 को काठियावाड़ के पोरबंदर (गुजरात) नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है। सालाना 2 अक्टूबर के दिन गांधी जयंती मनाई जाती है, गांधीजी के आदर्श और उनकी अहिंसा के मार्ग को पूरे विश्व ने सम्मान दिया है, आज गांधी जयंती महज भारत में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में मनाई जाती है। अब गांधी जयंती, अंतरराष्ट्रीय गांधी जयंती बन गई है।

गांधीजी की शुरुआती शिक्षा राजकोट में हुई थी। मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सन 1888 में वह पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। 1891 में जब वे बैरिस्टर बाबू बनकर भारत लौटे, तो उनकी मां पुतलीबाई का निधन हो चुका था, जो एक धर्मपरायण व आदर्श नारी थी। गांधी जी ने मुंबई से वकालत आरंभ की। वहां गरीबों के मुकदमे निशुल्क लड़ा करते थे। 1893 में उन्हें एक गुजराती व्यापारी के मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा था, दक्षिण अफ्रीका से गांधीजी करीब 20 वर्ष बाद भारत लौटे थे।

स्वदेश वापसी के पश्चात गांधीजी ने गुलाम भारतीयों की दुर्दशा देखी। तब उन्होंने पराधीन भारत की बेड़ियां काटने का संकल्प किया। उन्होंने अहमदाबाद के पास साबरमती के तट पर एक आश्रम की स्थापना की यहीं रहकर गांधीजी ने करोड़ों भारतीयों को आजादी के लिए प्रेरित किया।

1929 में गांधी जी ने ‘साइमन कमीशन’ का बहिष्कार किया। 1930 में दांडी में नमक सत्याग्रह करके कानून भंग किया। 5 मार्च 1931 को गांधी-इराविन समझौता हुआ वह अंग्रेजों को ‘नमक कानून’ वापस लेना पड़ा। सन 1942 में गांधीजी ने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ का नारा लगाया। इनके नतीजे में 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों को भारत को स्वतंत्र करना पड़ा।

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गांधीजी 125 वर्ष तक जीना चाहते थे। देश की स्वतंत्रता के समय गांधीजी की उम्र 77 वर्ष की थी। 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

गांधी जी ने कहा था कि वह आजाद भारतवर्ष को हर एक नागरिक के रहने के लिए एक आदर्श देश बनाएंगे। गांधीजी चाहते थे कि हम जो कुछ भी प्राप्त करें, उसे सत्य के करीब होना चाहिए और उसे हमेशा अहिंसा के द्वारा ही प्राप्त किया जाना चाहिए।

अतः आज गांधी जी के अहिंसा के मार्ग को पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है और उनके जन्मदिवस को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मना रहा है। यही कारण है कि 2 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश होता है।

तो यह था गाँधी जयंती पर निबंध आशा करते है, यह आपको पसंद आया होगा, गाँधी जयंती अगर आपको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करे।